आज आवश्यक है कि लोगो को काम मिले जिससे कोई भूखा ना रहे...
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेन्द्र गंधर्व संदेश दे रहे हैं, आये दिन ऐसे सामचार सुनने को मिलते हैं कि खाने की समस्या आ रही है, इसलिये आज आवश्यकता है कि लोगो को काम मिले, कोरोना के नाम पर भूखे मरने से अच्छा है कि लोग काम करें, जिससे घर चल सके, इसलिये वे सीजीनेट के माध्यम से सरकार से अपील कर रहे हैं कि लोगो को काम दिलाये| विरेन्द्र गंधर्व@9098921436. (AR)
Posted on: Jun 23, 2020. Tags: APPEAL CG RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
कल तक संग्राम था पाकिस्तान से...कविता-
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
कल तक संग्राम था पाकिस्तान से-
आज संग्राम है चीन से-
जब सबको पता है-
मिट्टी में मिलने के लिये थोड़ी सी जगह चाहिये-
किसी का रिश्ता नहीं ढेर सी जमीन से-
आज संग्राम है चीन से-
एकता के फूल टूट गये, आज ह्रदय के दाग से... (AR)
Posted on: Jun 20, 2020. Tags: CG POEM RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
कोरोना कोरोना रे, कोरोना कोरोना रे...कोरोना गीत-
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कोरोना गीत सुना रहे हैं :
कोरोना कोरोना रे, कोरोना कोरोना रे-
कब तक पड़ेगा इस बोझा को ढोना-
होगा समस्या से दो चार होना-
कब से बेटी सोचे मइके को जाती-
मइके को जाती मै रंग जमाती-
भाभी के बच्चो बच्चो के मन को बहलाती-
कुछ दिन तो घी के मै दीपक जलाती...
Posted on: May 26, 2020. Tags: CG CORONA SONG RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
छोटी उमर थी लम्बी डगर थी...रचना-
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक रचना सुना रहे हैं:
छोटी उमर थी लम्बी डगर थी-
उसकी मंजिल तय हो न पायी-
एक मासूम बच्ची, निकली थी राह में-
अपने गाँव पहुंचने की चाह में-
अपने गंतव्य तक वह पहुंच न पायी-
रास्ते में सांसो को डोरी टूट गयी-
जिंदगी उसके हांथो से छूट गयी...
Posted on: Apr 22, 2020. Tags: CG POEM RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
अच्छा खा और अच्छा सोंच, त्याग दे शर्म संकोच...कोरोना पर कविता-
जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
अच्छा खा और अच्छा सोंच-
त्याग दे शर्म संकोच-
कल तक चेहरा खुल्ला था-
आज पहना ले वस्त्र-
कोरोना से युद्ध करने का-
यही तो है एक शस्त्र-
एक दूजे से दूर रहो मार न दे कहीं चोंच-
अच्छा खा और अच्छा सोंच-
त्याग दे शर्म संकोच...
