जागा रे जागा सारा संसार- कविता
ग्राम- देवरी, तहसील-परतापुर, जिला- सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मूल निवासी भद्रा पानी के बारे मैं एक कविता सुना रहे है:
जागारे, जागारे, जागा सारा संसार
फूटी किरण लाल खुलता है पुरब का द्वार
जागा रे जागा रे जागा सारा संसार
अंगड़ाई लेती ये धरती उठी है
सदियों की ठुकराई मिट्टी उठी है
टूटे हो टूटे गुलामी के बंधन हजार
जागा रे जागा रे जागा सारा संसार ...
Posted on: May 16, 2019. Tags: CG CHHATTISGARH MUL NIVASI POEM SONG VICTIMS REGISTER
ले मसाल चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के...कविता
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया एक समाजवाद पे एक कविता सुना रहे हैं :
ले मसाल चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के,
अब अँधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गांव के,
पुछते हैं झोपड़ी, पुछते हैं खेत भी,
कब तक लूट ते रहेंगे लोग मेरे गांव के,
बिन लडे मिलता यहाँ जान कर,
अब लड़ाई लड़ रहें हैं लोग मेरे गाओं के...
Posted on: May 16, 2019. Tags: CG KAILASH SINGH POYA POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
पास नहीं है बैल भद्रा पानी दे- कविता
ग्राम- देवरी, तहसील-परतापुर, जिला- सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मूल निवासी भद्रा पानी के बारे मैं एक कविता सुना रहे है:
पास नहीं है बैल भद्रा पानी दे
पास नहीं है बैल भद्रा पानी दे
ज़ालिम है तू बैल भद्रा पानी दे
इज्ज़त दार गरीब पुकारे, डोंगी मारे दूध सवारे
इज्ज़त दार गरीब पुकारे, डोंगी मारे दूध सवारे
चटक रही खा परेल भद्रा पानी दे
पास नहीं है बैल भद्रा पानी दे...
Posted on: May 16, 2019. Tags: CG CHHATTISGARH MUL NIVASI POEM SONG VICTIMS REGISTER
समाजवाद- एक कविता|
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया एक समाजवाद पे एक कविता सुना रहे हैं :
समाज वाद बबुआ धीरे धीरे आयी,
अरे हाथी में आयी, घोरा में आयी,
अंग्रेजी बाजा बाजे, धीरे धीरे आयी,
अंधी से आयी, गाँधी से आयी,
बिरला के घर में समायी, समाजवाद बबुआ,
नौखा से आयी, धोखा से आयी...
Posted on: May 16, 2019. Tags: CG KAILASH SINGH POYA POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
आज ख़ुशी से उछल कूद कर रही थी खूब पढाई- कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
आज ख़ुशी से उछल कूद कर रही थी खूब पढाई
मछली के संग उसका होना था जो सजाई
करछुल झूम रहा था उसका मण को मण जो आई
हंस कर मचल उठी उसने ली अंगडाई
प्याज़ लसून देख रहे थी, उनकी हुई खूब पिटाई
मिर्च मसाला खड़े थे, उनकी खूब हुई कुटाई...
