कोरोना कोरोना रे, कोरोना कोरोना रे...कोरोना गीत-
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कोरोना गीत सुना रहे हैं :
कोरोना कोरोना रे, कोरोना कोरोना रे-
कब तक पड़ेगा इस बोझा को ढोना-
होगा समस्या से दो चार होना-
कब से बेटी सोचे मइके को जाती-
मइके को जाती मै रंग जमाती-
भाभी के बच्चो बच्चो के मन को बहलाती-
कुछ दिन तो घी के मै दीपक जलाती...
Posted on: May 26, 2020. Tags: CG CORONA SONG RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
छोटी उमर थी लम्बी डगर थी...रचना-
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक रचना सुना रहे हैं:
छोटी उमर थी लम्बी डगर थी-
उसकी मंजिल तय हो न पायी-
एक मासूम बच्ची, निकली थी राह में-
अपने गाँव पहुंचने की चाह में-
अपने गंतव्य तक वह पहुंच न पायी-
रास्ते में सांसो को डोरी टूट गयी-
जिंदगी उसके हांथो से छूट गयी...
Posted on: Apr 22, 2020. Tags: CG POEM RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
अच्छा खा और अच्छा सोंच, त्याग दे शर्म संकोच...कोरोना पर कविता-
जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
अच्छा खा और अच्छा सोंच-
त्याग दे शर्म संकोच-
कल तक चेहरा खुल्ला था-
आज पहना ले वस्त्र-
कोरोना से युद्ध करने का-
यही तो है एक शस्त्र-
एक दूजे से दूर रहो मार न दे कहीं चोंच-
अच्छा खा और अच्छा सोंच-
त्याग दे शर्म संकोच...
Posted on: Apr 20, 2020. Tags: CG CORONA POEM RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
जाते नहीं हैं काम पर, कोरोना के नाम पर...कोरोना पर कविता-
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व कोरोना पर एक कविता सुना रहे हैं:
जाते नहीं हैं काम पर, कोरोना के नाम पर-
कोरोना, कोरोना-
बस यहाँ वहां कोहराम है-
पशु पक्षी तो आजाद विचरण कर रहे हैं-
किन्तु मनुष्य गुलाम है-
कोरोना के नाम पर आज कैसी सजा दे है-
आज हर कोई अपने घर में कैदी है...
Posted on: Apr 15, 2020. Tags: CG CORONA POEM RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
बैसाखी के बाद आज अम्बेडकर जयंती...
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र बता रहे हैं कल 13 अप्रैल को हमने वैसाखी का त्यौहार मनाया था जो गेहूं के फसल के कटने की खुशी में सिक्ख धर्म के लोग मनाते हैं और आज 14 अप्रैल है आज के दिन भीमराव अम्बेडकर जयंती मनाई जाती है, अम्बेडकर संविधान निर्माता रहे, उन्होंने सभी को समानता का अधिकार दिलाया, जिससे आज सभी एक साथ रह सकते हैं, पढ़ लिख सकते हैं, इस आज के दिन उन्हें याद किया जाना चाहिये|
