वर्षा आई वर्षा आई घने-घने बादल लाई...कविता-
प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मानमती मरावी एक कविता सुना रही हैं :
वर्षा आई वर्षा आई घने-घने बादल लाई-
गरजे बादल चमके बिजली पानी की बौछारे पड़ते-
नदी, तालाब, खेत भर जाते सभी किसान खुश हो जाते-
कार्तिक में दिवाली आई वर्षा गई तो सर्दी आई-
ठंडी हवा लगे है बहने कपडे गर्म सभी ने पहने-
गेहू चना शुरू है बुवाई जैसे हरियाली देखे है...
Posted on: Sep 15, 2019. Tags: CG MANMATI MARAVI POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
रंग से सजी तितली रानी...कविता-
ग्राम-बेलर, विकासखण्ड-लोहंदिगुडा, जिला-जगदलपुर (छत्तीसगढ़) से अनामिका कश्यप और सुशीला कश्यप एक कविता सुना रहे हैं :
रंग से सजी तितली रानी-
अपना नाम बताती जाओ-
मै भी आऊँ मिलने कभी-
अपना पता देती जाओ...
Posted on: Sep 05, 2019. Tags: BHOLA BAGHEL CG JAGDALPUR POEM SONG VICTIMS REGISTER
सोते-सोते भूख लगी, खालो बेटा मुगफली...कविता-
खासपारा, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से श्रृष्टि एक कविता सुना रही हैं :
ऊपर पंखा चलती है, नीचे बेबी सोती है-
सोते-सोते भूख लगी, खालो बेटा मुगफली-
मूंगफली में दाना नहीं, हम तुम्हारे मामा नहीं-
मामा गये दिल्ली, दिल्ली से लाय बिल्ली-
बिल्ली मारी लात चल पड़ी बारात-
बारात में दो बच्चे मम्मी पापा अच्छे...
Posted on: Sep 05, 2019. Tags: CG POEM SHRISHTI SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
चिड़िया की पुकार...कविता-
IIIT नया रायपुर (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र कोरेटी एक कविता सुना रहे हैं :
देख रही है बैठी चिड़िया, कैसे अब रह पायेंगे-
काट रहे सब पेड़ों को तो, कैसे भोजन खायेंगे-
नही रही रही हरियाली अब तो, केवल ठूंठ सहारा है-
भूख प्यास में तड़प रहे हम, कोई नही हमारा है-
काट दिये सब पेड़ों को तो, कैसे नीद बनायेंगे-
उजड़ गया है घर भी अपना, बच्चे कहां सुलायेंगे-
छेड़ रहे प्रकृति को मानव, बाद बहुत पछतायेंगे-
तड़प तड़प कर भूख प्यासे, माटी में मिल जायेंगे-
चीं चीं चीं चीं बच्चे रोते, कैसे उसे मनायेंगे-
गर्मी हो या ठंडी साथी, कैसे उसे बचायेंगे...
Posted on: Sep 04, 2019. Tags: CG POEM RAIPUR RAJENDRA KORETI SONG VICTIMS REGISTER
लाला जी ने केला खाया...कविता-
ख़ास पारा, ग्राम-श्याम नगर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से श्रृष्टि राजवाड़े एक बाल कविता सुना रही हैं :
लाला जी ने केला खाया-
केला खाकर मुह पिचकाया-
मुह पिचाकार कदम बढाया-
कदम के नीचे छिलका आया-
लाला जी फिर गिरे धडाम-
मुह से निकला हाय राम...
