मतदाता बन जाये सभी और सभी करे मतदान जी...गीत-

मालीघाट, मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार मतदाता जागरूकता गीत सुना रहे हैं :
मतदाता बन जाये सभी और सभी करे मतदान जी-
जय जय होगी लोकतंत्र की होगा देश महँ जी-
जागे और जगाये सभी को सभी करे मतदान जी-
संविधान ने दिया है सबको यह ताकत उपहार यहां-
संविधान में सभी बराबर सबका है अधिकार यहां-
मतदाता बन जाये सभी और सभी करे मतदान जी...

Posted on: Jan 24, 2020. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

जागा है इन्सान ज़माना बदल रहा है...गीत-

मालीघाटी, मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनिल कुमार एक गीत सुना रहे हैं :
जागा है इन्सान ज़माना बदल रहा है-
उठा है तूफान ज़माना बदल रहा है-
जागा है इन्सान ज़माना बदल रहा है-
काश ये कुटिया देदे तो यह पूछ रहे उजियारे-
थर थर कांप रही है सत्ता कुर्सी वाले-
जनता है बस मान ज़माना बदल रहा है-
अरे उठा है तूफान ज़माना बदल रहा है-
जागा है इन्सान ज़माना बदल रहा है-
हिटलर साही नहीं चलेगी नहीं चलेगी-
हर सरकार से कह दो-
और अत्याचार नहीं चलेगी अत्याचारी से कह दो-
दो दिन का मेहमान ज़माना बदल रहा है...

Posted on: Jan 23, 2020. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

झारखंड धरे दुरा सुने कमल फूले...गीत-

मालीघाटी प्रसार केंद्र सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान एवं लोककला प्रशिक्षण केंद्र से सुनिल कुमार शांति शिवशंकर आजाद की रचना सुना रहे हैं:
झारखंड धरे दुरा सुने कमल फूले-
मधुमक्खी उरे जेकर सेती सुंदर लागे मांदर बाजे-
झारखण्ड धरे दुरा सुने कमल फूले-
मगर काकर महिना में अम्बा बिन लागे-
कोयल करे कुहू कुहू जेकर बोली सुंदर लागे-
झारखण्ड धरे दुरा सुने कमल फूले-
आगे ले फागुन माह टेसू फूले-
अमनी के मन मोर नाचे गाए,कि मांदर बाजे-
झारखण्ड धरे दुरा सुने कमल फूले...

Posted on: Jan 23, 2020. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

भईया गांधी जी का सपना सजाना...गीत-

मालीघात, मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक गीत सुना रहे हैं :
भईया गांधी जी का सपना सजाना-
हाय राम देशवा को है बचाना-
जो बोले थे लाना सत्य और अहिंसा-
मगर दुष्टो ने ले आया हिंसा-
मिल जुल के है हिंसा मिटाना-
हाय राम देशवा को है बचाना-
भईया गांधी जी का सपना सजाना...

Posted on: Jan 23, 2020. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

गुरु शंकराचार्य शास्त्रार्ध में कैसे हारे...

भारती के पति मंडन मिश्र मिथिलांचल में कोसी नदी के किनारे स्थित एक गांव महिषि में रहते थे। तब धर्म-दर्शन के क्षेत्र में शंकराचार्य की ख्याति दूर-दूर तक थी। कहा जाता है कि उस वक्त ऐसा कोई ज्ञानी नहीं था, जो शंकराचार्य से धर्म और दर्शन पर शास्त्रार्थ कर सके। शंकराचार्य देशभर के साधु-संतों और विद्वानों से शास्त्रार्थ करते मंडन मिश्र के गांव तक पहुंचे थे। यहां 42 दिनों तक लगातार हुए शास्त्रार्थ में शंकराचार्य ने हालांकि मंडन को पराजित कर तो दिया, पर उनकी पत्नी के एक सवाल का जवाब नहीं दे पाए और अपनी हार मान ली थी. शास्त्रार्थ की निर्णायक थीं भारती
मंडन मिश्र गृहस्थ आश्रम में रहने वाले विद्वान थे। उनकी पत्नी भी विदुषी थीं। इस दंपती के घर पहुंचकर शंकराचार्य ने मंडन मिश्र से शास्त्रार्थ करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने शर्त रखी कि जो हारेगा, वह जीतने वाले का शिष्य बन जाएगा। अब सवाल खड़ा हुआ कि दो विद्वानों के बीच शास्त्रार्थ में हार-जीत का फैसला कौन करेगा। शंकराचार्य को पता था कि मंडन मिश्र की पत्नी भारती विद्वान हैं। उन्होंने उन्हें ही निर्णायक की 21 दिनों में हार गए मंडन, फिर पत्नी ने दी शास्त्रार्थ की चुनौती
शंकराचार्य के कहे अनुसार भारती दोनों के बीच होने वाले शास्त्रार्थ का निर्णायक बन गईं। मंडन और शंकराचार्य के बीच 21 दिनों तक शास्त्रार्थ होता रहा। आखिर में शंकराचार्य के एक सवाल का जवाब नहीं दे पाए और उन्हें हारना पड़ा।

Posted on: Jan 22, 2020. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG STORY SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

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