झारखंड धरे दुरा सुने कमल फूले...गीत-
मालीघाटी प्रसार केंद्र सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान एवं लोककला प्रशिक्षण केंद्र से सुनिल कुमार शांति शिवशंकर आजाद की रचना सुना रहे हैं:
झारखंड धरे दुरा सुने कमल फूले-
मधुमक्खी उरे जेकर सेती सुंदर लागे मांदर बाजे-
झारखण्ड धरे दुरा सुने कमल फूले-
मगर काकर महिना में अम्बा बिन लागे-
कोयल करे कुहू कुहू जेकर बोली सुंदर लागे-
झारखण्ड धरे दुरा सुने कमल फूले-
आगे ले फागुन माह टेसू फूले-
अमनी के मन मोर नाचे गाए,कि मांदर बाजे-
झारखण्ड धरे दुरा सुने कमल फूले...
