भूख मरी में भी जय श्री राम...कविता
कानपूर उत्तरप्रदेश, से के एम् भाई एक कविता सुना रहे हैं, जिसका बिल हैं भूख मरी में भी जय श्री राम|
रोजगार भी नहीं चाहिए आवास भी नहीं चाहिए-
शिक्षा और स्वास्थ की भी कोई बात नहीं-
बीमारी में अल्लाह-अल्लाह गा लूँगा-
बीमारी में अल्लाह-अल्लाह गुनगुना लूँगा-
भूख मरी जय श्री राम का नारे लगा लूँगा-
रोजगार भी नहीं चाहिए आवास भी नहीं चाहिए...
Posted on: Nov 28, 2022. Tags: KANPUR POEM UP
गरीब बच्चों शिक्षा दिलाने में मदद करें
कानपुर से के एम भाई बता रहे हैं वे लोग गरीब परिवार के बच्चो के लिए काम कर रहे हैं। बुंदेल क्षेत्र के रहने वाले हैं और उनके माता पिता मजदूरी का कार्य करते हैं। करोना के समय उनका मजदूरी नहीं हो पाया ना ही उनके पास जमीन है। इसके कारण बच्चों का शिक्षा भी नहीं मिल पा रहा है। 5 बच्चे हैं कक्षा 2 से लेकर कक्षा 6 तक कानपुर में पढ़ाई कर रहे हैं। वहां खाने से लेकर रहने और पढ़ाई की व्यस्था की जाती है। उन्हें और भी मदद की जरुरत है। इसलिए सीजीनेट के साथियों से मदद की अपील कर रहे हैं। अधिक जानकारी हेतु संपर्क नंबर:7985181117.
Posted on: Nov 23, 2022. Tags: EDUCATION KANPUR PROBLEM UP
मेने मरते देखा हैं गाँधी को और एक चौराहे पे...कविता-
केम भाई कानपुर (उत्तरप्रदेश) से गाँधी जी का एक कविता सुना रहे हैं:
मेने मरते देखा हैं गाँधी को और एक चौराहे पे कभी खाखी वर्दी की आड़ में तो कभी तडपती जान में कभी अस्पताल के दौर पे तो कभी न्या के चौखट पे कभी खुद कैद के बेडीयो में तो कभी खुले आसमा में कभी भिखरी के रूप में तो कभी जलती लासो के रूप में हर एक इन्शान में और हर एक काल में और हर एक समाज में कल भी आज भी मेने मरते देखा हैं गाँधी को...
Posted on: Oct 11, 2022. Tags: KANPUR KEM BHAI POEM UP
आप महजिद तोड़ते हो आप मडर से खत्म करते हो...कविता
के एम भाई, कानपुर उत्तर प्रदेश से एक कविता सुना रहे हैं:
आप महजिद तोड़ते हो आप मडर से खत्म करते हो
आप हमारे रतम रिवाजों को जिहात बोलते हो बेसक आप हमारे महजीद गिरा सकते हो लेकिन हमारे खुदा को नहीं गिरा सकते हो...
Posted on: Sep 21, 2022. Tags: BHAI KANPUR KM PEAM UP
शहीद भगत सिंह की याद में...कविता-
कानपुर से केएम भाई एक कविता सुना रहे है जो 114वी जयंती पर शहीदे-ए-आजम को शत शत नमन करते हुये सुना रहे है :
शहीद भगत सिंह की याद में-
न आंसू हैं न है ख़ुशी-
न जश्न है न शोक-
हर लफ्ज़-
आज है खामोश…
इंकलाब का-
वो चेहरा-
आज बन गया-
है एक कोष...
न रंग है न है जोश-
न फ़िक्र है न रोष-
वतन का-
वो मतवाला-
आज हो-
गया है बेहोश....
न तप है न तपिश-
न शौर्य है न कशिश-
आजाद बिस्मिल का-
वो सरफ़रोश-
आज हो-
गया है एक पोज़.....
न गुलामी है न है ब्रिटिश-
न रंज है न है सितम-
पंजाब का-
वो भगत-
आज बन गया है-
यादों का एक कोष ...
