भगत सिंह मरता नहीं हिन्दुस्तानी घरानों से...कविता
कानपुर, उत्तरप्रदेश से के.एम.भाई शहीद भगत सिंह की 108 जयंती के अवसर पर एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं.
भगत सिंह मरता नहीं हिन्दुस्तानी घरानों से-
क्रान्ति की शोक लहरों पे, विचारों के डूबते समुन्दर में-
भगत सिंह की यादें जिंदा हैं हर एक पतवार पे-
लहू का रंग बदलता नहीं जुल्मों से हौसला टूटता नहीं-
भगत सिंह भुलाए भूलता नहीं इंकलाबी विचारों से-
तुम समझो या ना समझो, बलिदानों का रंग रिश्तों से भी ज्यादा गहरा होता है-
हर एक जमाने में, लाख सदियाँ बीत जाएं-
क्रांति की नई इबारतें लिख जाएं-
पर भगत सिंह मरता नहीं हिन्दुस्तानी घरानों से...
