आरक्षण का भूत जिंदा है और जिंदा रहेगा...आरक्षण पर कविता
कानपुर, उत्तरप्रदेश से के. एम.भाई मौजूदा आरक्षण व्यवस्था पर छिड़ी बहस के संदर्भ में एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं :
आरक्षण का भूत जिंदा है और जिंदा रहेगा-
जाति बदले या ना बदले, क्रांति रंग लाए या ना लाए-
पर आरक्षण का फूल जरूर खिलेगा-
फलेगा-फूलेगा और बिकेगा, हर बाजार हर कारोबार में-
रोटी मिले या ना मिले, गरीबी मिटे या ना मिटे-
पर आरक्षण का तेल मुक्त मिलेगा, हर काल और हर दौर में-
भुखमरी के हालात बदले या ना बदले-
विकास का पहिया चले या ना चले-
पर आरक्षण की गाडी जरूर दौड़ेगी, हर गली हर नुक्कड़ पे-
अम्बेडकर तू याद आए या ना आए-
लोकतंत्र बचे या ना बचे
पर आरक्षण का भूत जिंदा है और जिंदा रहेगा...
