कविता : छोटे शहर की लड़की

सीजीनेट श्रोता गीता एक कविता सुना रहे हैं, “छोटे शहर की लड़की”
हूँ मै छोटे शहर की लड़की-
पर ख्वाब नहीं है छोटे मेरे-
करके दरिया को पार-
दूर गगन को छूना है मुझे-
तुफानो को पीछे छोड़-
आगे बढ़ना है मुझे... (AR)

Posted on: Mar 06, 2021. Tags: GEETA POEM