वनांचल स्वर: सिमटते जंगल...
ग्राम-धनेली कन्हार, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़)
सुकराम फरदिया बतातें हैं कि २० वर्ष पहले जंगल अच्छी स्तिथि में था, झाड भी बहुत थे| हमें फल-सब्जी भी जंगल से आसानी से मिल जाता था| जंगल से मिलने वाले खाद्य पदार्थो से हमारा गुजारा हो जाता था| जंगल से फल लाकर हम लोग बेचते भी थे| लेकिन अब सब खत्म होता जा रहा है, शासन ध्यान नही दे रहा है| शासन वाले गाँव वालों से आकर बोलते ही कि जंगल बचाओ लेकिन वो खुद ध्यान नही देतें| नर्सरी भी खत्म हो गयी है| सागौन का पेड़, अमली, कटहल यह सब जंगल में नर्सरी में लगाया गया था| लेकिन अब खत्म हो गया है| जंगल खत्म हो चुका है, इसलिए घेराबंदी कि जा रही है जंगल को बचाने के लिए| अब लकड़ी नही मिलता, शासन सिलिंडर गैस देता है| अपनी निजी ज़मीन पर ही हम उगाते हैं|
सम्पर्क:- 6568921280(RM)
