दुर्बल को ना सताइये जाके मोटीहाये..दोहा-
जिला-राजनांदगांव छत्तीसगढ़ से विरेन्द्र गंधर्व एक दोहा सुना रहें है:
दुर्बल को ना सताइये जाके मोटीहाये-
एक साँस के जीव से लोई भष्म हो जायें-
कोसी को कमजोर समझ कर सताना नही चाहियें-
क्यों की उनका बदुआ एक दिन हमें नष्ट कर देगी-
एक लोहा इतना कठोर होता है लोहार की ठोकनी-
क्यों की उसमे जान नही है फिर भी उसे पघला देती है-
दुर्बल को ना सताइये जाके मोटीहाये...(182520) GT
