रोते-रोते हसना सीखो हस्ते-हस्ते रोना...कविता-
जिला-महाराजगंज उत्तरप्रदेश से भीम सिंह एक कविता सुना रहें है:
रोते-रोते हसना सीखो हस्ते-हस्ते रोना-
जितना चाहे उतना भीरी भाल मिले-
बस पुत्र चाहे खेलाओ ना रोते-रोते-
हम दोनों एक हमरी प्यारी प्यारी मुन्ना है-
बस येही छोटी सी अपनी सारी दुनिया है-
खुशिया से आजाद है अपने घर के कोना-कोना-
रोते-रोते हसना सीखो हस्ते-हस्ते रोना...(182405) GT
