आया बादल, आया बादल देखो-देखो बालू काला...कविता-
जिला-रुनिया, बिहार से खलेश कुमार एक कविता सुना रहें है:
आया बादल, आया बादल देखो-देखो बालू काला-
घुमड़-घुमड़ कर आसमान में देखो मंडराया बादल-
आया बादल, आया बादल देखो-देखो बालू काला-
हाथी मोटा दांतों वाला कितने रूप बनाया बादल...(182340) GT
