इस समाधि में छिपी हुयी हैं एक राक कि देरी...कविता-

ग्राम-मवाही,जिला-बाँदा,राज्य-उतर प्रदेश से सुरेन्द्र पाल कविता सुना रहें हैं:
इस समाधि में छिपी हुयी हैं एक राक कि देरी
चल कर जिसने स्वतंत्रता कि दिव्य आरती फेरी
यह समाधि हैं लघु समाधि हैं झाँसी कि रानी कि
अंतिम लीला असली यही हैं लक्ष्मी मर्दानी कि
यहीं कहीं पर बिखर गयी हैं वह बदम विजय माला कि
उसके फूल यही संकित हैं यह स्मृति माला कि ID (182335)RM

Posted on: Dec 05, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER