आजादी में जीवन मैंना तुग्गा पिंजरे में हो बंद दुखी हो जाती सुख सुविधा...कविता-
बिहार से सुरेन्द्र पाल कविता सुना रहें हैं:
आजादी में जीवन मैंना तुग्गा
पिंजरे में हो बंद दुखी हो जाती सुख सुविधा
मन का आहम वजन फिर भी चहक ना पाती
चिड़िया घर में कैद शेर रहा दम दहाड़ गुर रहा
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