धूरि भरे अति शोभित श्याम जू...कविता-
ग्राम-मवई, जिला-बाँदा (उत्तरप्रदेश) से सुरेंद्र पाल एक कविता सुना रहे हैं:
धूरि भरे अति शोभित श्याम जू-
तैसी बनी सिर सुन्दर चोटी-
खेलत खात फिरैं अँगना-
पग पैंजनिया कटि पीरी कछौटी-
वा छवि को रसखान विलोकत-
वारत काम कलानिधि कोटी-
काग के भाग कहा कहिए हरि हाथ सों ले गयो माखन रोटी...(AR)
