का बर्षा जब कृषि सुकाने तमेछु पुनिका पछताने...कविता-

ग्राम-मवई,जिला-बांधा, राज्य-उतरप्रदेश से सुरेन्द्र पाल कविता सुना रहें हैं:
का बर्षा जब कृषि सुकाने तमेछु पुनिका पछताने-
पर उपदेश कुशल बहुतीरे जिया चर हित नर नग मेरे-
कादर मन कहूँ एक आधारा दय दय आलसी पुकारा-
हित यन हित पशु पछ निजाना मानुष तन गुण ज्ञान निधाना-
बिन संतोष काम नसाई काम ही सत सुख सपने हुनाई...(182228)RM

Posted on: Dec 10, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER