धुरी भरे अति सोभे तीसो समय बीते...कविता-
उत्तरप्रदेश से सुरेन्द्र एक कविता सुना रहें है:
धुरी भरे अति सोभे तीसो समय बीते-
समय जुते सु बने सी सुन्दर चोटी-
खेलत खाते फिर अंगना पजनी बाजथे-
वहा चो बी कोरस खाने भी लोकथे-
भारत ते कम काला निजी कोटि-
धुरी भरे अति सोभे तीसो समय बीते...(182174) GT
