धुरी बरे अति शोभित चमे जूते...कविता-

ग्राम-मवई, जिला-बांधा, राज्य-उतरप्रदेश से सुरेन्द्र पाल कविता सुना रहें हैं:
धुरी बरे अति शोभित चमे जूते-
सी बनी सीरी सुंदर चोटी-
खेलत खाते फिरय अंगना-
में बाजथे सजनी पीरी कर चोटी-
वह सभी को रस खाने को मोका-
ते वारा ते काम कालानी कागेके-
भागे बड़े सजनी हारी हाथों से-
ले गयो माखन रोटी...(182168) GT

Posted on: Dec 07, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER