देश की माटी देश का जल...कविता-
बिहार से भक्त प्रहलाद एक कविता सुना रहे हैं:
देश की माटी देश का जल-
हवा देश की देश का फल-
सरल बने प्रभू सरल बने-
देश के घर और देश के घाट...(AR)
बिहार से भक्त प्रहलाद एक कविता सुना रहे हैं:
देश की माटी देश का जल-
हवा देश की देश का फल-
सरल बने प्रभू सरल बने-
देश के घर और देश के घाट...(AR)