दुरी भरे अति शोभित..कविता-
ग्राम-मवई,जिला-बाँदा,राज्य-उतर प्रदेश से सुरेन्द्र पाल कृष्णा जी का कविता
सुना रहें हैं:
दुरी भरे अति शोभित-
समय पे कैसी बने सिर सुंदर चोटी
खेलते खाते फिरय अंगना
फग पहनी बाजाते फिरि का चोटी
वह छबी को रस खाने..(182104)RM
