जब एक-एक कर सभी भी...कविता-

जिला-बलरामपुर, (उत्तरप्रदेश) सर्वेश सिंह एक कविता सुना रहें है:
जब एक-एक कर सभी भी-
रोने अपना कौशल दिखलायें-
पर कोई भी धनुष को हिला भी ना पाया-
सब हुए क्रोधित विदेराज उस-
जब एक-एक कर सभी भी...(182005) GT

Posted on: Dec 27, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER