दीप जले दीप जले द्वार-द्वार दीप जले...कविता-
ग्राम पंचायत-धुरली, जिला-दंतेवाडा (छत्तीसगढ़) से मनीषा एक कविता सुना रही है:
दीप जले दीप जले द्वार-द्वार दीप जले-
दीप जले दीप जले गाँव-गाँव, बगिया की छांव-छांव-
दीवारों पर आँगन में, धूम मची है ठांव-ठांव-
आओ रे गाओ रे ढोलक ले नीम तले-
नन्ही सी दीप कि नेहे कि उज्वारे है-
मोहस के चंदा है राह के सहारे है-
दीप जले दीप जले द्वार-द्वार दीप जले...(180276) GT
