इससे पहले भी चुभे हैं, महामारी के कई दंश...कविता-

राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
रावण का न वंश रहा-
न महिसासुर का वंश-
फिर कैसे रह पायेगा कोरोना का अंश-
इससे पहले भी चुभे हैं-
महामारी के कई दंश-
समूल हि नष्ट हुये रहा न उनका अंश... (AR)

Posted on: Oct 14, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER