जाग नवजवान जाग राह पथ निहारती...कविता-
बड़वानी (मध्यप्रदेश) सुरेश कुमार एक कविता सुना रहे हैं:
भारती पुकारती भारती गुहारती-
जाग नवजवान जाग राह पथ निहारती-
जाग और जग जगा, जागरण के गीत गा-
देख तो सही उधर-
खिल खिला उठी किरन-
जाग नवजवान जाग राह पथ निहारती... (AR)
