मानव हो रहा है बेरहम...कविता-
जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व कोरोना को लेकर एक कविता सुना रहे हैं:
मानव हो रहा है बेरहम-
कोरोना के नाम पर ढाय जा रहे हैं सितम-
घटनायें हो रही हैं शर्मसार-
मनुष्य से छुड़ाया जा रहा है संसार-
कोरोना के नाम पर बढ़ रही हैं नफरतें-
दूषित हो रहीं हैं हसरतें...(AR)
