निर्मल जल कल कल, छल छल...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक स्वरचित कविता सुना रहे हैं:
निर्मल जल कल कल, छल छल-
बहती अविरल जल धारा-
रुकती नहीं थकती नहीं-
समुद्र उसे है सबसे प्यारा-
चट्टानों को तोड़ फोड़कर-
आगे बढ़ती निरंतर जाती...
