ब्राम्हा से कुछ लिखा भाग्य में...कविता-
ग्राम-बाखरा, ब्लाक, जिला-कोंडागांव (छत्तीसगढ़) से चंपावती एक कविता सुना रही हैं:
ब्राम्हा से कुछ लिखा भाग्य में-
मनुश्य नहीं जाया है-
अपना सुख उसने अपने-
भूजल से ही पाया है-
प्रकृति नई धरकर झुकती है-
कभी भाग्य के बल पे सदा-
हारती वही मनुष्य है...
