पानी काबर नई तो बरसे न...लोक गीत-
ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट एक छत्तीसगढ़ी मौसमी लोक गीत सुना रहे हैं:
सबके मन होवथे उदास रे, पानी काबर नई तो बरसे न-
रात दिना गर्मी के कारण टप-टप चुवे पसीना-
लाइन लगाथन पानी खाथन मुश्किल होगे जीना-
नगरिहा बैला मरथे पियास रे, पानी काबर नई तो बरसे न...
