न जान न पहचान, फिर भी सौंप दी नन्ही सी जान...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
न जान न पहचान-
फिर भी सौंप दी नन्ही सी जान-
अल्हड जवानी होता बड़ा सैतान-
जान कर भी बन जाता अंजान-
सबको होती है जो प्यारी-
पलभर की करती नहीं देरी...
