मेरी भी ईद, तेरी भी ईद...ईद पर कविता
के.एम. भाई कानपुर, उत्तरप्रदेश से ईद के पर्व पर एक कविता सुना रहे है:
मेरी भी ईद, तेरी भी ईद-
तेरे घर की सिवयीं मेरी खीर-
सरबत का रंग तेरा मेरा नीर-
मेरी अज़ान पे हो तेरी नमाज़-
तेरी दुआ पे हो मेरा आगाज़-
मै कलमा पढू तू करे इफ़्तिआर-
तेरे हाथ चूमने से मेरा हो एतबार-
ख़ुशी का समां कुछ ऐसा हो-
मेरे सुर पे हो तेरी ताल-
मै भी रहू खुश और-
तू भी रहे खुशहाल-
कुछ ऐसा हो-
ईद का हो प्यार-
ईद का हो प्यार ...
