नक्सलियों की धमकी, सहकर्मी की हत्या और मोटरसाइकिल पे डेलीवेरी... अबूझमाड़ में स्वास्थकर्मी का जीवन

ग्राम पंचायत- थुलथुली, जो की ब्लाक मुख्यालय ओरछा से 20 किमी अंदर अबूझमाड़ में है, जिला- नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से आयतुराम मंडावी जी बता रहे है पिछले 5 साल से मितनिन प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। उनके गांव व काम में कई तरह की परेशानियों आती हैं। वे कहते हैं वहाँ बारिश के समय मोटरसायकल नहीं जा पाती। नाला पार करने के लिए लोग अपनी सायकल कंधे पे उठा कर ले जाते हैं। यहाँ के लोग सरकार की सारी योजनाओं से वंचित हैं। इन्हें लोगों को स्वास्थ सेवा देने के लिए माओवादियों की धमकी और मुखबिरी का आरोप झेलना पड़ता है। उनके सहकर्मी, हंदावाड़ा के मितनिन प्रशिक्षक संतोष लेखामी की उनकी पोलिओ ड्यूटी के समय माओवादियों ने मुखबीर बता कर हत्या कर दी। गाँववाले उनके पास इलाज के लिए आते हैं। उनके पास दस्त, निमोनिया, मलरिया जैसी बीमारियों की दवा रहती है। गर्भवती महिलाओं की डेलीवेरी में बहुत दिक्कत आती है। वे बताते हैं कि एक महिला जो की प्रसव पीड़ा में थीं, उन्हें अस्पताल ले जाते समय मोटरसाइकिल पे ही उनकी डेलीवेरी करनी पड़ी। आधिक जानकारी लेने के लिए संपर्क- 9479104729, 9406299466.

Posted on: Sep 15, 2021. Tags: AAYTURAM MANDAVI ABUJHMAAD CG DELIVERY HEALTH WORKER NARAYANPUR ORCHHA THULTHULI

पीड़ितों का रजिस्टर: रिश्तेदार को मुखबीर बता कर मारने की धमकी दी, 2015 से नारायणपुर में रह रहे हैं...

दिनेश कुमार यादव, जो की 2015 से नक्सल हिंसा से पलायन कर नारायणपुर के गुडरीपारा में रहते हैं, बताते हैं कि माओवादी उनके पिता को मारना चाहते हैं। उनका गाँव किलम, ग्राम पंचायत कडेनार, ब्लॉक कोंडागांव, जिला कोंडागांव, छत्तीसगढ़ में है। उनके बड़े पापा का परिवार गांव छोड़ कर उनके बेटे की पढ़ाई के लिए शहर या गए थे, जिस कारण नक्सली उन्हें मुखबीर समझते हैं। उनसे बदला लेने के लिए, माओवादियों ने दिनेश के पिता को मारने की धमकी दी। उनकी गांव में 45 एकड़ जमीन थे, लगभग 100 मवेशी थे व 30-40 बकरियाँ थीं। वो सब कुछ छोड़ कर उनके परिवार को भाग कर नारायणपुर आना पड़ा। उनके पिता रोजी मजदूरी करते हैं। उन्हें सरकार से रु. 10,000 सहायता राशि मिली थी, लेकिन उसके अलावा उन्हें और कोई मदद नहीं मिली है। वे अभी नारायणपुर के बंगलापारा में सरकारी स्कूल में 8वीं कक्षा में पढ़ते हैं। संपर्क नंबर@6381489052

Posted on: Aug 25, 2021. Tags: CG DINESH YADAV GUDRIPARA KADENAR KONDAGAON MAOIST VICTIM NARAYANPUR VICTIMS REGISTER

पीड़ितों का रजिस्टर: माओवादियों ने बेटे को मुखबीर बता कर मार दिया, तब से नारायणपुर में रहते हैं...

रसूल कोर्राम, ग्राम पंचायत मैनागवाड़ी, ब्लॉक नारायणपुर, जिला नारायणपुर, छत्तीसगढ़ से बताते हैं कि 2002 में नक्सलियों ने उनके बेटे को मुखबीर बता कर मार डाला, तब से वे नारायणपुर जिला मुख्यालय के बंगलापारा में एसपीओ कालोनी में रहते हैं। वे बताते हैं कि उनका बेटा 10वीं कक्षा में पढ़ता था। नक्सलियों ने जन अदालत कर उनके बेटे को 2 बार पीटा था। उसके बाद जब माओवादी उसे खोजने लगे, तब वे अपने बेटे को लेकर नारायणपुर भाग गए। लेकिन वहाँ पुलिस से मिलीभगत कर, नक्सलियों ने उसे बड़गांव में मार डाला। सरकार से उन्हें रु. 1 लाख व रहने के लिए 2 डिस्मिल जमीन मिली थी, लेकिन उससे संबंधित कोई भी दस्तावेज नहीं दिया, जिससे उनका आधिपत्य प्रमाणित हो सके। वर्तमान में रोजी मजदूरी करके गुजारा करते हैं।

Posted on: Aug 21, 2021. Tags: CG DISPLACED KILLED MAINAGAWADI MAOIST VICTIM NARAYANPUR RASUL KORRAM VICTIMS REGISTER 2002

पीड़ितों का रजिस्टर: शहर आवाजाही पे मुखबीर समझकर गांव से भगाए गए...

रैनूराम हिचामी, ग्राम ढुंडरीबेड़ा, पंचायत मेटानार, ब्लॉक ओरछा, जिला नारायणपुर, छत्तीसगढ़ से बताते हैं कि वे अपने गांव में शिक्षक के रूप में काम करते थे। उन्होंने कक्षा 12वीं तक पढ़ाई कि है। बच्चों के लिए कॉपी-किताब लाने व बैंक के काम से उनहेइऑन नारायणपुर आना जाना पड़ता था। इसी कारण उनपे नक्सलियों ने मुखबिरी का शक किया। जिसके पश्चात वे और उनकी पत्नी पलायन कर नारायणपुर जिला मुख्यालय या गए और तब से नायपारा में रहते हैं। सरकार से उन्हें कोई मदद नहीं मिली है। संपर्क नंबर@7646842674

Posted on: Aug 21, 2021. Tags: CG DISPLACED MAOIST VICTIM METANAR NARAYANPUR ORCHHA RAINURAM HICHAMI VICTIMS REGISTER

पीड़ितों का रजिस्टर: गाँव के 2 लोगों की मुखबीर करार देके हत्या, डर से आधा गाँव खाली...

सुखदेव कचलाम, ग्राम बोगान कोयलीबेड़ा से 20 किमी दूर नारायणपुर जिला, बताते हैं कि माओवादियों ने उनके गाँव के 2 लोगों को मुखबिरी का आरोप लगा कर मार डाला। उनसे जुड़े हुए कार्यकर्ताओं से उन्हें भनक लगी कि माओवादी उन्हें भी मुखबीर समझ कर उनपे भी नजर रखे हुए हैं, जिसके बाद वे अपनी बच्ची को डॉक्टर को दिखाने के बहाने से 2009 में नारायणपुर आ गए। कुछ दिन बाद उनकी पत्नी भी वहाँ आ गईं। वे बताते हैं कि वे गायत्री परिवार से 1997 से जुड़े हुए हैं और जिन 2 लोगों की माओवादियों ने हत्या की, वे भी गायत्री परिवार से जुड़े हुए थे। वर्तमान में वे गुडरीपारा, नारायणपुर मे रहते हैं व घरों में बिजली का काम करते हैं। उनकी माँ अभी भी गाँव में खेती-बाड़ी करती हैं। उनके गाँव के 14-15 परिवारों में से 7 परिवार माओवादियों के डर से नारायणपुर में ही रहते हैं। उन्हें 2012-13 में सरकार से रु 30,000 सहायता राशि मिली, लेकिन उसके अलावा ना रहने को जमीन मिली, ना जीवन यापन के लिए नौकरी। वे अभी भी पुनर्वास योजना की आस में हैं। संपर्क नंबर @942414873

Posted on: Aug 10, 2021. Tags: CG DISPLACED KOYLIBEDA MAOIST VICTIM NARAYANPUR SUKHDEV KACHLAM VICTIM VICTIM REGISTER 2009

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