अले जाति भाति पोरी येलो ले...गोंडी गीत
ग्राम-उलिया, तहसील-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से सुमित्रा तिमा गोंडी गीत सुना रही है:
रेला रेला रेला रे रे रेला रे रे ला-
सले रेला रे रे रेला – अले जाति भाति पोरी येलो ले-
कुवे ले ले ले कुवे ले-
सले ले ले ले कुवे ले अले – जाति बाति पोरी येलो ले-
कुवे ले ले ले कुवे ले-
ताना ओना जोड़ी येलो ले...
Posted on: Sep 05, 2018. Tags: CG GONDI KANKER KOELIBEDA SONG SUMITRA TEEMA
तिना नामोर नानो रे नानो रे ये ये ये...गोंडी गीत...
ग्राम पंचायत-ताडवाली, विकासखण्ड-कोयलीबेडा, जिला उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से गणेश आयाम के साथ गाँव के ग्रामीण गोंडी भाषा में एक गीत सुना रहे हैं:
तिना नामोर नानो रे नानो रे ये ये ये-
गायतन लोनु वेहट रा लयोरी-
पुनवाय माने बुम तोर रा लयोरी-
ढोलता नुकंग बाते रा लयोरी-
बस्तर बुम ता आन्दोम रा लयोरी –
पुनवान्क पुछे मायतोरोम लयोरी-
वेहोम आयो वेह्तोम रा लयोरी...
Posted on: Sep 05, 2018. Tags: CG GANESH AYAM GONDI KANKER KOELIBEDA SONG
ओरछा गाँव का नाम कैसे पड़ा: एक गाँव की कहानी (गोंडी)
ग्राम-ओरछा, पंचायत-इरपानार, ब्लाक-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से दुर्गुराम कवाची (सरपंच) उनके ओरछा गाँव का नाम कैसे पड़ा उसके बारे में गोंडी में बता रहे है कि बहुत समय पहले उनके गाँव के आसपास पूरा जंगल था वहां पर 10-12 घर थे और ओरछा के पेड़ सबसे ज्यादा थे लेकिन वहां पर सरकार ने पूरे ओरछा के पेड़ कटवा दिए तो फिर वहां पर जनसँख्या बढ़ने लगी और उन्ही पेड़ो के कारण उस गाँव का नाम ओरछा रखा गया और यह जानकारी उनके गाँव के बुजुर्गो के माध्यम से मिली |आदिवासी गाँव अक्सर उनके आसपास पाए जाने वाले प्राकृतिक वस्तुओं पर रखे जाते हैं ओरछा को गराड़ी या गर्रा या विषफल भी कहते हैं घरों में बल्ली और खेतों में बागड़ की तरह यह उपयोग में लाया जाता है
Posted on: Sep 05, 2018. Tags: CG DURGKONDAL DURGURAM KAVACHI GONDI KANKER STORY
निया विनती कियातोरोम हजारों पेन बाबा रो...गोंडी देवी गीत
ग्राम-चाहचड, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से गणेश्वरी दुग्गा और मनीषा दुग्गा एक गोंडी में गीत सुना रहे है इस गीत को देवी देवताओं को प्रणाम करते समय में गाया जाता है:
निया विनती कियातोरोम हजारों पेन बाबा रो-
निया विनती कियातोरोम जिम्मेदारी याया रो-
निया आरती कियातोरोम जगा रीती याया न-
निया आरती कियातोरोम कली काकली याया न-
निया आरती कियातोरोम जगों रायता याया न-
निया विनती कियातोरोम हजारों पेन बाबा रो...
Posted on: Sep 04, 2018. Tags: CG GANDESHWARI DUGGA GONDI KANKER MANISHA DUGGA RELIGION SONG
हम लोगों ने चिड़िया जैसे उड़ते हेलीकॉप्टर को तो देखा है पर कभी ट्रेन नहीं देखा है (गोंडी भाषा में)...
आज के आधुनिक युग में कई यातायात के साधन है लेकिन मेकावाही गाँव की महिलाओं ने हेलीकाप्टर को उड़ते हुए तो देखा है लेकिन ट्रेन नहीं देखा है। मोहन यादव आज सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा के साथ ग्राम-मेकावाही, पंचायत-शंकरनगर, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) पहुंचे हैं वहां की महिलाएं सीताबाई, हिन्दूबाई और पन्नोबाई गोंडी में उनको बता रही है कि वे लोग आज तक कभी ट्रेन नहीं देखे है न ही बैठे है कैसा रहता है वो भी उनको मालूम नहीं है वे लोग बस, कमांडर और ऑटो में सिर्फ बैठे है | आज के आधुनिक युग में कई यातायात के साधन है लेकिन मेकावाही गाँव की महिलाये बता रही है कि नजदीक से न तो हेलीकाप्टर को देखे है न ही ट्रेन को देखे है

