पीड़ितों का रजिस्टर: कक्षा 10 वी में पढ़ाई करने वाली लड़की को नक्सल गतिविधियों में शामिल होने का आरोप
ग्राम-पचांगी, तहसील-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से धनसिंह कोमरा बता रहे हैं कि 2008 कि बात हैं मेरी बहन जिसकी उम्र तब 17 वर्ष थी, वह मौसा जी के घर में रह कर पढ़ाई कर रही थी, वह कक्षा 10 वी में थी| एक दिन सुबह दुकान से वापस घर आने के रास्ते में बी.एस.एफ. के सैनिक उसे अपने साथ ले गये| उन पर नक्सल गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया, उन्हें एक साल राजनंदगांव जेल में रखा गया| जेल से छूटने के बाद वह स्कूल नहीं गयी, उसे डर था सब उसका मजाक उडाएँगे| वो पढ़ना चाहती थी, एक साल की जेल और दो साल पेशी में उसने बहुत कुछ खोया, इस पुरे मामले में उनके 50 हजार रुपये खर्च हुए| घर मे पैसे नही थे, उधर लेकर मुकदमा लड़ना पड़ा|
सम्पर्क नम्बर @9425292387(185491)RM
Posted on: Feb 25, 2021. Tags: CG DHANSINGH KOMRA DURGUKONDAL KANKER VICTIM REGISTER
जिन्दगिया के खेला समझ में आवे...लोकगीत-
जिला-गाजीपुर (उत्तरप्रदेश) से शैलेष यादव एक भोजपुरी लोकगीत सुना रहे हैं:
मन सपना के महल बनाबे दुनिया ढेला चलाबे-
जिन्दगिया के खेला समझ में आवे-
जब-जब दिन बिगड़े पर होला-
केहू रोक न पावे-
का जाने का लीखल किस्मत में-
केकरो पता नही पाई जिन्दगिया के खेला समझ में आवे...(AR)
Posted on: Feb 25, 2021. Tags: SONG
लकड़ी के मकानों में चिरागे न जलाना...गजल-
उत्तरप्रदेश से शिवकुमार एक गजल सुना रहे हैं:
गम देके रुलाते हो हंसाने नही आते-
ये लोग तो नये हैं-
पुराने नही आते-
लकड़ी के मकानों में चिरागे न जलाना-
लगी आग पडोसी भी बुझाने नही आते-
सूखा है पेंड राह का राही नही आते...(AR)
Posted on: Feb 25, 2021. Tags: GAJAL
वनांचल स्वर : चार के बीजो को बेचकर हम लोग जीवन यापन करते है...
ग्राम-मोदे, थाना-कोरर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से हेमबती नायक चार के बीज के बारे में बता रही हैं कि वे लोग सुबह-सुबह 4 बजे उठकर मड़िया का पेज बनाते हैं, पेज लेकर ही जंगल जाया करते हैं| जंगल में दिनभर चार का बीज इकठ्ठा करते हैं, शाम को घर पहुँचकर बीजों को भिगा देते हैं| चार को लगभग तीन-चार दिन भिगाने के बाद पानी से साफ़ करते हैं, उसके बाद चार को सुखाते हैं| बीज जब अच्छी तरह से सुख जाता है हम उसे बेचने ले जाते हैं| चार बेचकर जो पैसा मिलता है, उसी से जरूरत का सामान खरीदते हैं| इस समय चार के पेड़ बहुत कम बचे हैं, पेड़ो को लोग काट देते हैं या फिर फल-फूल को बंदर खा जाते हैं| इसलिए चार नही मिल पाता है| जंगल मे भालू भी हैं, वो दिन में जंगल में रहते हैं रात को गांव में आ जाते हैं| गांव में बेर के फल खाने और तालाब का पानी पीने आ जाते हैं, अभी तक भालुओं ने किसी भी इंसान को कोई नुकसान नही पहुंचाया है, इस जंगल में बन्दर, भालू और चीते जैसे जानवर पाए जाते हैं|
सम्पर्क:- 7587094923
Posted on: Feb 25, 2021. Tags: CG HEMBATI NAYAK KANKER VANANCHAL SWARA
पाप रूपी समुंदर में हाये रे धरम डोंगा...गीत-
जमशेदपुर, झारखण्ड से बाबूलाल एक गीत सुना रहे हैं:
पाप रूपी समुंदर में हाये रे धरम डोंगा-
चले लगल धीरे-धीरे-
चले लगल रसे-रसे-
न डरब बहब प्रभु तोर सहारा-
हाये रे हमर डोंगा-
पांपी मन कहाये प्रभु तोर सहारा...(AR)
