तू ही प्रभु मेरे प्रभु यीशु...मसीह गीत-
जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से पूनम देवांगन एक मसीह गीत सुना रही हैं:
योग केवल तू योग केवल तू-
ही प्रभु मेरे प्रभु यीशु-
पवित्र केवल तू पवित्र केवल तू-
ही प्रभु मेरे प्रभु यीशु-
आदर और महिमा हो तेरे-
प्रभु मेरे प्रभु यीशु-
योग केवल तू योग केवल तू...(AR)
Posted on: Mar 18, 2021. Tags: CG KORIA PUNAM DEWANGAN SONG
स्वास्थ्य स्वर : हाथी पाँव रोग का औषधीय प्रयोग-
ग्राम-रनई, थाना-पटना, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से वैद्य केदारनाथ पटेल हाथी पाँव रोग का औषधी के प्रयोग के बारे में बता रहे हैं, आक की जड़ को कांजी के साथ पीसकर लेप बना ले इससें अत्यधिक लाभ होता है|2 बलियारी कंघी मूल चूर्ण और दूध के साथ सेवन करने से लाभ हो सकता है| हंजी, पिपली, पाठा, छोटे कटेरी, चित्रक मूल, जीरा, नागर मोठा इन सबको मिलाकर चूर्ण बना ले और गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से लाभ हो सकता है| संबंधित विषय पर जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं| संपर्क नंबर@9826040015. (184277) GT
Posted on: Mar 05, 2021. Tags: CG HEALTH KEDARNATH PATEL KORIA
स्वास्थ्य स्वर : जलोदर बीमारी को ठीक करने का घरेलू नुस्खा...
ग्राम-रनई, थाना-पटना, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से वैद्य केदारनाथ पटेल जलोदर बीमारी को ठीक करने के लिये घरेलू नुस्खा बता रहे हैं| गुलबास की पत्ती 50 ग्राम लेकर पानी के साथ पीसकर छान लें और रख लें| रोगी को दिन में 4 बार सेवन करायें लाभ हो सकता है| दूसरा उपचार करौंदे के पत्ते का रस 10 मिली लीटर की मात्रा में सेवन करना है| उसके बाद 20 मिली लीटर देना है, इस प्रकार बढ़ाते हुये मात्रा में 10 दिन तक देना है| उसके बाद घटाते हुये मात्रा में देना है| इसका सेवन सुबह करें| संबंधित विषय पर जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं| संपर्क नंबर@9826040015. (AR)
Posted on: Jan 03, 2021. Tags: CG HEALTH KEDARNATH PATEL KORIA SONG VICTIMS REGISTER
हम तो आदिवासी गा भईया, जांगर ठुर कमइया...सरगुजिहा भाषा में एक आदिवासी गीत
ग्राम-बड़े साल्ही, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से सुरजाल सिंह आरमो सरगुजिहा भाषा में एक आदिवासी गीत सुना रहे है:
हम तो आदिवासी गा भईया, जांगर ठुर कमईया-
खेती बाड़ी के करईया नाँगर के जुतईया-
माता बेटा के बेटा दुलरवा, धरती के सेवा करईया-
छेरी गोरु के चरईया, गुल्ली डंडा के खैलईया-
पेच पसीया पानी के पीयईया, दुख सुख मा गोड़ी धरम गीत के गवईया-
जंगल झाड़ी के बसईया, काटा खुटी के रीगईया...
