वनांचल स्वर: वनों से प्राप्त महुआ को हमलोग उपयोग के सांथ साथ आय के लिए बेचते भी हैं...
ग्राम पंचायत-बेतो, ब्लाक-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से लालप्रताप जयसवाल और रामदर्शन जायसवाल बता रहे हैं कि उनका गांव वनों से घिरा है. वे वनों से महुवा, तेंदू पत्ता, चार, आंवला अदि प्राप्त करते हैं, वे खुद 1 से 2 क्विंटल तक महुआ प्राप्त कर लेते है, जिसे अपने उपयोग के लिए रख लेते है, और आय के लिए बेचते भी हैं, इसके अलवा लाटा बनाकर भी खाते हैं, लाटा बनाने के लिए महुआ को सुखाकर, भूनकर चने के सांथ मिलाकर कूट लेते है, उसके बाद लड्डू बनाकर खाते हैं, इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए दिए गए नंबर पर संपर्क कर सकते हैं : संपर्क नंबर@7354761508.
Posted on: Jun 10, 2018. Tags: BABUAL NETI SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : पुराने ज़माने में जब धान कोदो पैदा नहीं होता था लोग महुआ आदि ही खाते थे...
ग्राम-पेंडारी, ब्लाक-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से ब्रेजलाल कुशवाह बता रहे है कि उनका गाँव जंगल के किनारे बसा हुआ है वहां से उनको जलाऊ लकड़ी मिलता है, आंवला, तेंदू, छार, बेलवा भी मिलती है पर्याप्त मात्रा में साल की लकड़ी मिलती है और उसके अलावा महुआ भी मिलता है उसका उपयोग दारु बनाने और उसको पीसकर लाटा बनाकर भी खाया जाता है और ढेकी से कूटकर लड्डू बनाकर सुखाया जाता है और फिर खाया जाता है| पुराने ज़माने जब धान कोदो पैदा नहीं होता था उस समय लोग महुआ खाकर जीवित रहते थे| महुआ का उपयोग आज भी किया जाता है. बाबूलाल नेटी@9669083404.
Posted on: Jun 07, 2018. Tags: BRIJLAL KUSHWAH SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : आग से जलने पर घरेलू उपचार -
वैद्य भगतराम लांझी, ग्राम-घोंघा, थाना-बोडला, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) बता रहे है आग से जलने पर सरई लासा (राल) को बारीक पीस ले, फिर उसे कपड़े से दो बार छानिये उसके बाद उसमे पानी और तीली का तेल डालकर मथन करिये उसके बाद थोड़ा सा पानी डालिये, और मथिये उसके बाद पानी को फेंक दे. ये प्रक्रिया 5-6 बार करे और जब वह सफेद हो जाएगा तो उसमे करंज नीम आरसी का तेल मिलाकर जले हुए जगह में रुई से लगाइए, इसे दिन में दो बार लगाना है, सांथ ही उसमे करंज का तेल लगाना है जिससे मक्खी न आए और दूर्गंध न हो इसे लगातार एक हफ्ते उपयोग करने से आराम मिल सकता है | लांझी@7389964276.
Posted on: Jun 07, 2018. Tags: BHAGTARAM LANJHIT HEALTH SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : श्वेत प्रदर का घरेलू उपचार -
ग्राम-रेहंगी, पोस्ट-लोरमी, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से वैद्य चन्द्रकांत शर्मा आज हम लोगो को महिला रोग में श्वेत प्रदर या सफ़ेद पानी निकलने की बीमारी का घरेलू उपचार बता रहे हैं जो आम तौर पर बहुत सी महिलाओं को होता है. वे बता रहे हैं कि अशोक के पेड़ की छाल का चूर्ण और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर गाय के दूध के साथ एक चम्मच की मात्रा सुबह शाम सेवन करना है दूध को भी थोडा सा कुनकुना गर्म कर ले| यह बहुत अच्छी औषधि है इसे ज़रुरत पड़ने पर दो बार भी ले सकते है, तीन बार भी ले सकते है | कुछ सप्ताह तक सेवन करने से उसमे बहुत बड़ा लाभ मिल जायेगा| वैद्य चन्द्रकांत शर्मा@9893327457
Posted on: Jun 07, 2018. Tags: CHANDRAKANT SHARMA HEALTH SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : जड़ी बूटी से मलेरिया का उपचार -
ग्राम-कुबेरपुर, विकासखंड-ओडगी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से प्रेमसुंदर पोर्ते बता रहे है कि वे एक जड़ी बूटी के बारे में जानते है जिससे मलेरिया का इलाज किया जा सकता है. मलेरिया जिसको आता है वे पत्थरनेंग, महुआ बोकला, रोहिना छाली, मिलाकर पीयेंगे तो मलेरिया कभी नहीं होगा | इस दवाई को वे खुद ही तैयार करके पीते हैं, उनको 55-56 साल हो गए न तो वे आज तक डॉक्टर के पास गए, न उनसे कभी गोली लिए, न सुई लगवाये | वे हमेशा बगैर चप्पल के चलते है| आज तक उनको मलेरिया नहीं हुआ | जड़ी बूटी से ही मलेरिया की बीमारी को दूर कर देते है| गणेश सिंह आयाम@9479003195.
