समझ में आय मेरी बात जवाब कहो...ग़ज़ल
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार विजया भारती की एक रचना सुना रहे हैं:
समझ में आए मेरी बात जवाब कहो-
भली लगे तो कहो ठीक या ख़राब कहो-
तुम्हारी बात करते तो उम्र चल निकली-
सम्भालूँ कब तलक सूखे गुलाब कहो-
हर एक जफावो को देखा है पास बहोत-
मेरे वजूद जख्मो की एक किताब कहो-
शक्लो हुनर में हम भी किसी से कम तो नहीं...
Posted on: Apr 06, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
अरे बाबा बन फुले लरेया है नीम...सोहर गीत
ग्राम-मालीघाट,जिला-मुजफ्फरपुर(बिहार) से सुनील कुमार
साथ में रामविलास पासवान एक सोहर गीत सुना रहे है:
ये गीत बच्चे के जन्म होने पर गाया जाता है
अरे बाबा बन फुले लरेया है नीम-
भैया बन ठन ली फुलई हे हे-
ललना रे स्वामी कोनो फुले...
Posted on: Apr 03, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
जब गुस्सा मे बरल बा दुलार...रचना
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर, (बिहार) से सुनील कुमार,
कुमार विरल की रचना सुना रहे है:
जब गुस्सा मे बरल बा दुलार-
प्रभु जी भुजिया के प्यार हो गइल-
केहू प्यार से जे देवे दुत्कार-
त भुजिया की प्यार हो गइल
चाहब की चेहरा इआद नाहीं आवे-
चाहब की मिलला पे मन नाहीं-
बाकि देखला पे झरे हरसिंगार-
त भुजिया के प्यार हो गइल...
Posted on: Apr 02, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
बुद्ध का अंतिम भोजन-
गांव के एक गरीब आदमी के निमंत्रण को स्वीकार कर बुद्ध उसके यहाँ भोजन करने गए. गरीबी के कारण बिहारी गरीब लोग जो बरसात के दिनों में जो लकड़ी पर कुकुरमुत्ता पैदा होता हैं उसे इकटठा कर सुखा लेते हैं एवं सब्जी बनाकर खाते हैं .कभी-कभी कुरकुरमुत्ता में जहर मिल जाने से जहरीला हो जाता हैं.बुद्ध के द्वारा गरीब का भोजन आनन्दपूर्वक खाते रहे जबकि जहरीला कुकुरमुत्ते सख़्त कड़वे मुँह में रखना भी मुश्किल था और गरीब व्यक्ति से कहते रहे कि मैं बहुत आनंदित हूं .बुद्ध के घर से निकलने पर जब गरीब आदमी ने सब्जी चखा तो तुरंत भागा हुआ बुद्ध के पास पहुँचा और कहने लगा कि सब्जी तो जहर थी और गरीब आदमी छाती पीटकर रोने लगा .इसपर बुद्ध ने कहा तू चिंता मत कर क्योंकि में जानता हूं अमृत हैं. बुद्ध ने कहा तू धन्यभागी है तू सौभाग्यशाली हैं .आनंदित हो कि हजारों वर्षो मे बुद्ध जैसा व्यक्ति पैदा लेता हैं .दो ही व्यक्ति को उसका सौभाग्य मिलता हैं पहला भोजन कराने का अवसर उसकी माँ को मिलता हैं और अंतिम भोजन कराने का अवसर तुझे मिला हैं.तू सौभाग्यशाली हैं आनंदित हो इसपर बुद्ध के शिष्य कहने लगे यह आदमी हत्यारा हैं .बुद्ध ने कहा भूलकर भी ऐसी बात नहीं कहना अन्यथा उसे लोग परेशान करेंगें .जाओ गांव में डुंडी पीटकर बता दो की यह आदमी सौभाग्यशाली हैं क्योंकि इसने बुद्ध को अंतिम भोजन दान दिया हैं. सुनील कुमार@9308571702
Posted on: Apr 01, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
हर बिखरे अनुभव के रेशे को समेट कर लिखता है...भवानी प्रसाद मिश्र की कविता-
सुनील कुमार भवानी प्रसाद मिश्र की कविता सुना रहे हैं:
बुनी हुई रस्सी को घुमायें उल्टा-
तो वह खुल जाती हैं-
और अलग अलग देखे जा सकते है-
उसके सारे रेशे-
मगर कविता को कोई/ खोले ऐसा उल्टा-
तो साफ नहीं होंगे हमारे अनुभव-
इस तरह/क्योंकि अनुभव तो हमे-
जितने इसके माध्यम से हुए हैं-
उससे ज्यादा हुए हैं दूसरे माध्यमों से-
व्यक्त वे जरूर हुए हैं यहाँ-
कविता को/ बिखरा कर देखने से-
सिवा रेशों के क्या दिखता है-
लिखने वाला तो-
हर बिखरे अनुभव के रेशे को-
समेट कर लिखता हैं...

