जो भी दुनिया को दिया वो नूर ज़िंदाबाद है, जिसकी मेहनत से मिला मज़दूर ज़िंदाबाद है...
मालीघाट ,जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार ) से सुनील कुमार महेश कटारे सुगम की
रचना सुना रहें हैं:
जो भी दुनिया को दिया वो नूर ज़िंदाबाद है-
जिसकी मेहनत से मिला मज़दूर ज़िंदाबाद है-
सुख के संसाधन बनाये दे दिए सबके लिए-
खुद रहा बेबस बहुत मज़बूर ज़िंदाबाद है-
उम्र भर अपना पसीना खेत में बोता रहा-
ख़ुदकुशी करके मरा लातूर ज़िंदाबाद है-
सरहदों पर जो खड़ा चौकस निगहबानी करे-
देश भक्ति के नशे में चूर ज़िंदाबाद है-
खूब इतरा लो अमीरी पर मगर सच है यही-
इस धरा पर श्रम का कोहिनूर ज़िंदाबाद है...
Posted on: May 01, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
30 अप्रैल बाल श्रम उन्मूलन दिवस: बच्चो से काम ना ले, उनको पढने-लिखने को प्रोत्साहित करे...
30 अप्रैल बाल श्रम उन्मूलन दिवस के रूप में मनाया जाता है, बाल श्रम एक कलंक है बाल श्रम करवाना एक दंडनीय अपराध है, कोई व्यक्ति या नियोजक बच्चो से काम लेते है तो उन नियोजको के खिलाफ बाल श्रम प्रतिशेध विनियम संसोधन अधिनियम 2016 के अन्तर्गत कारवाई का प्रावधान है, सरकार द्वारा बाल श्रम उन्मूलन विमुक्ति एवं पुनर्वास के लिए राज्य कार्य योजना के अनुरूप राज्य के सभी जिलो में धावा दलों के माध्यम से बच्चे बाल श्रम से विमुक्त कराए जाते है, प्रत्येक वर्ष बाल श्रम उन्मूलन दिवस के रूप में मनाया जाता है, देश के सभी नागरिको से यह अनुरोध है की वह बच्चो से काम नहीं लेने का संकल्प ले एवं उनको पढने,लिखने को प्रोत्साहित करे- सुनील कुमार@9308571702.
Posted on: Apr 30, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
हरियर हरियर लीचीया होईछई उदास हे, बरसारानी अईबअ कबहु पास हे...बज्जिका भाषा में गीत
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार बज्जिका भाषा में फल गीत सुना रहे हैं :
हरियर- हरियर लीचीया होईछई उदास हे-
बरसारानी अईबअ कबहु पास हे-
जल्दी आब ,जल्दी आब ,कब से पियासल हें-
थोड़का पनिया से होएब हम मिठास हे-
लाल-पियर होई जाईब इहे हम्मर आस गे-
बरसा रानी......
Posted on: Apr 28, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
आज के युवा औरों की सोच ढोने की बजाय अपनी सोच कैसे बनाएं इस पर काम करने की ज़रुरत है...
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार के साथ आज हैं रंजीत कुमार जो विवेकानन्द स्टडी सर्किल के माध्यम से लोगो में जन चेतना फैलाने का काम कर रहे हैं, वह बता रहे है कि आज युवा अपनी सोच की बजाय दूसरों की थोपी सोच को ढोने को विवश है जिसके कारण युवाओं में तरह-तरह कि विकृतियाँ आ रही है वह बाज़ार और दिखावे से प्रभावित है. वे समाज के बुद्धिजीवी लोगो से युवाओं को दिशा देने और उन्हें जोड़ने का अनुरोध कर रहे हैं ताकि युवाओ के सोच में परिवर्तन हो सके और आज समाज में फैले अराजकता, असहिष्णुता, साम्रदायिकता की भावना भरी है उसमें कैसे बदलाव लाया जाए इस पर मिलकर मिलकर विचार किया जाए. सुनील@9308571702
Posted on: Apr 27, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
बुरा लगे तो लगे हमारे ठेंगे से, कोई कुछ भी कहे...गीत
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक गीत बुरा लगे तो लगे हमारे ठेंगे से सुना रहे हैं:
बुरा लगे तो लगे, हमारे ठेंगे से – कोई कुछ भी कहे-
नहीं मौत के आगे कोई मंजिल है-
बचता है जो बचे हमारे ठेंगे से...

