सहकार रेडियो : "इंक़लाब ज़िंदाबाद क्या है?"
श्रोताओं, आज सुनिए प्रसिद्ध लेख “शहीद भगत सिंह का लेख- “इंक़लाब ज़िंदाबाद क्या है?”। इसे आवाज़ दी है पवन सत्यार्थी ने। ये कार्यक्रम सहकार रेडियो से लिया गया है| इस संदेश को सुनने के लिये 0805006000 पर मिस्ड कॉल कर भी सुन सकते हैं|
Posted on: Oct 01, 2020. Tags: SONG STORY VICTIMS REGISTER
Impact:सीजीनेट में सन्देश रिकॉर्ड करने के पश्चात् गाँव में सभी को मच्छरदानी वितरण कर दिए गया...
निवासी मुकेश कुमार परस्ते बता रहे हैं कि बारिश के होने से गाँव में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया था, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ने लगी थी इसलिये वे सीजीनेट के माध्यम से सरकार से अपील कर रहे थे कि इसके नियंत्रण के लिये मच्छरदानी वितरण किया जाए| जो की सीजीनेट में सन्देश रिकॉर्डिंग किये थे जो की सीजीनेट के साथियों की सहयोग से समस्या से संबधित अधिकारीयों से बात करके मच्छरदानी वितरण कराने में मदद किये इसलिए सभी पद अधिकारीयों एंव सीजीनेट सुनने वाले साथियोंको धन्यवाद कर रहें हैं. संपर्क@9754815101 RK
Posted on: Oct 01, 2020. Tags: IMPACT STORY SONG VICTIMS REGISTER
सहकार रेडियो : विद्यार्थी और राजनीति...
श्रोताओं, आज सुनिए प्रसिद्ध लेख “शहीद भगत सिंह का लेख – विद्यार्थी और राजनीति”। इसे आवाज़ दी है पवन सत्यार्थी ने। ये कार्यक्रम सहकार रेडियो से लिया गया है| इस संदेश को सुनने के लिये 0805006000 पर मिस्ड कॉल कर भी सुन सकते हैं|
Posted on: Sep 30, 2020. Tags: SONG STORY VICTIMS REGISTER
ईश्वर अलग अलग रूपो में आते हैं...कहानी-
बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक कहानी सुना रहे हैं:
एक छोटा बच्चा ईश्वर से मिलना चाहता था, उसने प्रार्थना किया ईश्वर मुझसे बात करें, तभी एक चिड़िया चहचहाई लेकिन बच्चे ने नहीं सुना, फिर बच्चे ने कहा तब अकास में गर्जना हुई, बच्चे ने फिर ध्यान नहीं दिया| इस तरहसे ईश्वर ने उसे अलग अलग रूपों में दर्शन दिया| आखिर में बच्चे ने कहा मुझे स्पर्ष करिये जिससे मुझे पता चले, ईश्वर ने उसे स्पर्ष किया तब उसे अहसास हुआ, ईश्वर अलग अलग रूपों में आते हैं हम नहीं पहचान पाते हैं| (AR)
Posted on: Sep 30, 2020. Tags: SONG STORY VICTIMS REGISTER
जो करना है आज कर लो...कहानी-
अंतिम सांसे ले रहे रावण से लक्ष्मण ने पूंछा, तुम्हारी अंतिम सीख क्या है? उसने जवाब दिया| कोई काम कल पर नहीं छोड़ना चाहिये| मै सभी चीजो से संपन्न था लेकिन अपने काम को कल पर छोड़ता रहा और आज मेरे पास समय नहीं है| (AR)
