एक दिन दुर्योधन पीपल के पेड़ के नीचे पेशाब कर रहा था...पांच पांडवों पर आधारित कहानी-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी पांच पांडवों की एक पौराणिक कहानी जो दुर्योधन पर आधारित है सुना रहे हैं. एक दिन दुर्योधन पीपल के पेड़ के नीचे पेशाब कर रहा था उसके पेशाब से पीपल का बीज बहने लगा तब एक दासी वहां से गुजरी और हंसने लगी उसने उस समय कुछ भी नहीं कहा उसके बाद वह राज दरबार में दासी को बुलवाया और प्रश्न किया कि तुम मेरे पेशाब करने पर क्यों हँसी इस पर दासी ने जवाब दिया आपके पेशाब करने से जब इस विशाल वृक्ष का बीज बह गया तो ये पांच पाण्डव आपका क्या क्रर लेंगे आप तो इन्हें ऐसे ही समाप्त कर देंगे। यह सुनकर तब दुर्योधन बहुत खुश हुआ और उस दासी को बहुत इनाम दिया | पडियारी@9981622548

Posted on: Sep 15, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

चलो जी सखी, चलो जी साथी, कलेक्टर कर जावो...गीत -

ग्राम-तमनार, जिला-रायग़ढ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक गीत सुना रहे है :
तन न न न न जी, तन न न न न-
चलो जी सखी, चलो जी साथी-
चलो जी भौजी, चलो जी मितानी-
कलेक्टर कर जावो, कलेक्टर कर जावो-
कलेक्टर कर जाके भी दी, सुख दुःख ला करावो-
कलेक्टर हमर जिला के, मालिक हवे,
ऊला हमर दुःख सुख ला जनावो-
हमर सुख दुःख ला जनवा के, संगी साथी-
ओकर अपन गुहार लगावो-
ओकर कना जी बड़े दयालु-
चलो जी सखी, चलो जी साथी-
चलो जी भौजी, चलो जी मितानी...

Posted on: Aug 14, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

नान नान लईका मन सियानी बघारथे...छत्तीसगढ़ी कविता

ग्राम तमनार, जिला रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पढ़यारी छत्तीसगढ़ी बोली में एक रचना प्रस्तुत कर रहें हैं :
नान नान लईका मन सियानी बघारथे-
बुढा बबा के दाढ़ी-मेछा चुंदी ला लाल करर्या कर ढारथे-
बूढी दाई ला घलों सुघ्घर-सुघ्घर गोठ करकें पटा ढारथे-
ओकरों चुंदी मुड़ी ला घलो लाल करर्या कर ढारथे-
नवा-नवा गोठ करकें, हमला रिझाथे-
अपन बनाय रद्दा मा हमला रेंगाथे...

Posted on: Jul 01, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

चल जाबो पानी ढ़लाएबर आगे सावन महिना...छत्तीसगढ़ी सावन गीत

कन्हैयालाल पडियारी ब्लाक-तमनार, जिला-रायगढ़ (छतीसगढ़) से छत्तीसगढ़ी भाषा में सावन गीत सुना रहें हैं:
चल जाबो पानी ढ़लाएबर आगे सावन महिना-
चारो धाम मा जाबो,बारो ज्योतिलिंग मा पानी ढ़लाबो-
पानी ल ढ़लाके शिवजी ला मनाबो-
नवा-नवा प्रेम हावे ओला गाढ़ा बनाबो-
लगन निकालबो, बिहाऊ ला करबो-
रोज लइकामन जनावो की-
घर परिवार ला सुघर बनाबों-
सबके डगर में चलबो, नवा रस्ता बनाबो-
लोग लईकामन के जिंदगी ला संवारबो-

Posted on: Jun 30, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

ये धरती, ये जंगल, ये नदियां, ये पेड़ों के झुरमुट...प्रकृति कविता -

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
ये धरती, ये जंगल, ये नदियां, ये पेड़ो के झुरमुट-
इनके आगोश में रहकर मिलता स्वर्ग का सुख-
इनकी रक्षा करें, ये हमारे रक्षक-
इनको कर लो थोडा नमन...

Posted on: May 24, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

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