वनांचल स्वर: जड़ी बूटी के बारे में बता रहें-

ग्राम-मोदे, ब्लॉक-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से वैद्यराज मनोज कुमार पटेल बताते हैं कि वह किस-किस जड़ी-बूटी का इस्तेमाल कर मरीजों का इलाज करते हैं। उनका परिवार यह काम पीढ़ी दर पीढ़ी करता आ रहा है। वह जनता के लाभ के लिए यह काम निःशुल्क कर रहे हैं। निमोनिया, चर्म रोग संबंधी घाव, खुजली जैसे छोटे-मोटे रोगों का इलाज में जंगल से जड़ी-बूटी लाकर करते हैं। व्यवसायीकरण और बाज़ारीकरण के कारण बहुत सी जड़ी बूटियां विलुप्त हो गयी हैं|

Posted on: Feb 22, 2021. Tags: KANKER CG MANOJ PATEL VANANCHAL SWARA

वनांचल स्वर: योनी रोग का घरेलू उपचार...

ग्राम-रनई, थाना-पटना, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से वैद्य केदारनाथ पटेल मानसिक रोग का घरेलू उपचार बता रहे हैं, योनी में छोटे-छोटे दाने हो जाते है खुजली हो जाती है, रोगी को बहुत पीड़ा होती, आम वृक्ष छाल का रस, 15-30 ग्राम बकरी के दूध के साथ 1 सप्ताह सेवन करने से लाभ हो सकता है|
2. अमलतास का बिज को जल के साथ पिस कर उपदंस के जख्मों पर लेप करने लाभ हो सकता है|
3. अर्ग के जड़ के छाल को छाया में सुखा कर बारीक चूर्ण बना ले, 5 ग्राम चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से लाभ हो सकता है, संबंधित विषय पर जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं| संपर्क नंबर@9826040015. (184949) GT

Posted on: Feb 22, 2021. Tags: KEDARNATH PATEL KORIYA CG VANANCHAL SWARA

वनांचल स्वर: परंपरागत खेती की आज की खेती से तुलना करते हैं...

ग्राम-मोदे, ब्लॉक-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से मनोज कुमार पटेल परंपरागत खेती की आज की खेती से तुलना करते हैं। मोदे गाँव में पहले परांपरगतढंग से खेती का प्रचलन था। यह इलाका नदी किनारे बसावट वाला है। यहाँ जंगल से आने वाला पानी जमीन में बैठकर जमीन को उपजाऊ बना चूका है। यहाँ खेती करने के लिए किसी प्रकार की खाद की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। मनोज के पूर्वज जमीन से पानी निकालने के लिए लकड़ी का ‘टेढ़ा’ बनाते थे। परन्तु आज खेती करने वाले लोग खाद का इस्तेमाल करते हैं। मनोज के मुताबिक इसका कारण यह हो सकता है कि देशी बीज के इस्तेमाल में कमी आई है। आधुनिकरण के कारण किसान अब कम समय में ज्यादा खेती करना चाहते हैं। सम्पर्क:- 9479070321, 6268684544 (185674) GT

Posted on: Feb 20, 2021. Tags: CG KANKER MANOJ PATEL VANANCHAL SWARA

वनांचल स्वर : वनों को बचाने में वन समितियों का योगदान...

ग्राम-धनेली कनार, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से प्रेमलाल कोमरा वन सरंक्षण समिति के बारे में बता रहे हैं| वनों में स्थित पेड़ों की कटाई पर नज़र रखते हैं| जो लोग पेड़ों को काटते हैं हम उन लोगों पर जुर्माना लगाते हैं| हमारे गाँव में वृक्षारोपण कर्मचारी आए थे और वृक्षारोपण करके गये थे, हम लोग उन पौधों की देखभाल करते हैं| हमारी समिति का काम जंगल में लगने वाली आग को भी फैलने से रोकना है| इस कार्य में हमारी सबसे बड़ी मदद मोबाइल करता है जिस पर हम सभी जुड़े हैं| आग को रोकने क लिए समिति परम्परांगत तरीकों का इस्तेमाल करती है| समिति वृक्षारोपण भी करती है जिसमे भेलवा, बांस, खम्हार और भी कई तरह् के वृक्ष लगाती है| (RM)

Posted on: Feb 20, 2021. Tags: CG KANKER PREMLAL KOMRA VANANCHAL SWARA

वनांचल स्वर : कोशम के पेड़ में लाख की खेती...

ग्राम-कवाची कटेल, ब्लाक-दुर्गकोंदल, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से राजकुमार नेताम बता रहे हैं कि ये लोग पूर्वजों के समय से जंगलो में रहते हैं आदिवासी हैं और कोशम के पेड़ो में लाख लगाते हैं, 40 से 50 घर के लोग लाख की खेती करते हैं| एक आदमी एक साल में लगभग 20 से 25 किलो लाख बिक्री करते हैं, एक किसान लाख की खेती से कभी 5 हजार रूपये, कभी 20 हजार रूपये, 50 हजार रूपये कमा लेते हैं| इसी पैसे अपना जरुरतों को पूरा करते हैं, लाख की साल में 2 बार कटाई होती है| गाँव के लोगों को लाख की खेती करने से बहुत लाभ होता है| सम्पर्क:- 9407611048 (RM)

Posted on: Feb 19, 2021. Tags: CG KANKER RAJKUMAR NETAM VANANCHAL SWARA

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