वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्त्तव्य मार्ग पर डट जावें...कविता-
ग्राम पंचायत-खजूरी, तहसील-प्रतापपुर, थाना-प्रतापपुर, जिला सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से राजू पैकरा एक गीत कविता सुना रहा है:
वह शक्ति हमें दो दयानिधे-
कर्त्तव्य मार्ग पर डट जावें-
पर-सेवा पर-उपकार में हम-
निज जीवन सफल बना जावें-
हम दीन-दुखी निबलों-विकलों के-
सेवक बन संताप हरें-
जिस देश-जाति में जन्म लिया-
बलिदान उसी पर हो जावें-
छल, दंभ-द्वेष, पाखंड-झूठ-
अन्याय से निशिदिन दूर रहें-
जीवन हो शुद्ध सरल अपना-
शुचि प्रेम-सुधा रस बरसावें-
वह शक्ति हमें दो दयानिधे-
कर्त्तव्य मार्ग पर डट जावें...
Posted on: Sep 21, 2019. Tags: CG SHYAMSHAH PAIKRA RAJU PAIKRA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
कैसे करो मै माता तोर बखान ओ...देवी गीत-
प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से श्यामसाय पैकरा एक गीत सुना रहे हैं:
माँ तोर ममता जग मा है महान ओ-
कैसे करो मै माता तोर बखान ओ-
नौ महीना में तैहां पेट मा पोतारे-
दसवां के छांव परे तब माता अवतारे-
मईयां तोर कर ममता के खदान ओ-
कैसे करों मै माता तोर बखान ओ...
Posted on: Sep 19, 2019. Tags: CG SHYAMSAY PAIKRA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
कोन बन आमा कोन बन जाम...गीत-
ग्राम-कोटया, थाना, विकासखण्ड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
कोन बन आमा कोन बन जांम-
कोन बन में भुलागे लखन सियाराम-
राम बने आमा लखन बने जांम-
वृंदावन में भुलागे लखन सियाराम-
कोन बन आमा कोन बन जांम...
Posted on: Sep 19, 2019. Tags: CG MEWALAL DEVANGAN SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
काबर भीजे रे गोरिया सावन भादो करछै...गीत-
ग्राम-कोटया, थाना प्रतापपुर, जिला सूरजपुर (छत्तीसगढ़ ) से गायक प्रसाद रजवाड़े एक गीत सुना रहे हैं:
काबर भीजे रे गोरिया सावन भादो करछै-
बरिस आथे पानी हाये रे तोर जवानी जैसे हिलोर मारे-
काबर भीजे रे गोरिया सावन भादो करछै-
बरिसथे पानी हिबछा खेरे रानी जैसे हिलोरमारे...
Posted on: Sep 19, 2019. Tags: CG GAYAK PRASAD RAJWADE SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
एक गुरु और शिष्य की कहानी-
बहोत पहले की बात है, एक गुरु अपने शिष्यों को शिक्षा देते थे, उसमे एक शिष्य ऐसा था, जो प्रतिदिन अध्यन करने जाता था लेकिन उसे कुछ ज्ञान नहीं होता था, उसे रोज डांट पड़ती थी, जिसके कारण उसके पिता उसे आश्रम नहीं भेजते थे, ऐसा चलता रहा, एक दिन उनके घर के पास बगीचे में एक ऋषि यात्रा के दौरान आराम करने रुके थे, ये देखकर बच्चे के पिता ने उसे भोजन लेकर ऋषि को देने के लिये भेजा, बच्चा उदास मन से उनके पास पहुँचा, ऋषि ने उसके उदासी का कारण पूछा, बच्चे ने सारी बात बतायी, तब ऋषि ने उसे गायत्री मंत्र का उच्चरण करने को कहा, बच्चे ने ऐसा ही किया जिससे उसकी स्मरण शक्ति अच्छी हो गयी, और वह पढ़ने में अच्छा हो गया|
