जात्ता जतरी म दरद पिटत रहन हो...छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे है:
जात्ता जतरी म दरद पिटत रहन हो-
आइस मशीन जमाना खेला ठगवा होइन वो-
एकी गुसड म उलट चलत रहन वो-
आइस मील जमाना खेला ठगवा होइन वो...
Posted on: Jun 16, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
आज धरती माँ अपने तक़दीर पर रो रही है...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं:
आज धरती माँ अपने तक़दीर पर रो रही है-
जिन्हें खोया उन्हें खोज रही है-
काला बाजारी मक्कारी भी शरमा रही है-
आँखों ही आँखों में आंसू बहा रही है-
हैवानियत को सीमा पार हो गई है-
अस्मत के लुटेरो का बाजार हो गई-
आज धरती माँ अपने तक़दीर पर रो रही है...
Posted on: Jun 02, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
हलत नहिये जी, ढोलत नहिये जी...छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे है:
हलत नहिये जी, ढोलत नहिये जी-
का हो गए बुढवा बाबनला बोलत नहिये जी-
चप्पर-चप्पर मंतर बोलत रहे जी-
अब तो मुंह लगे कछु कहत नहिये जी-
काहित मने मन म गुनत हवे जी-
बिहाव के भावर ला गिन्जारत नहिये जी...
Posted on: Apr 29, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
बेटी तै जाथस ससुराल वो, बने-बने रहबे...बेटियों पर छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी बेटियों से सम्बंधित एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे है:
बेटी तै जाथस ससुराल वो-
बने-बने रहबे-
मुंह ला रख बे संभाल के-
सांस ससुर ला-
दाई दादा के सम्मान बे-
नन्द देवर ला भाई बहन वो-
जेट जेठानी ला भाई-
बहुजाई के सम्मान बे वो...
Posted on: Apr 29, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
बजगरी मन मगन बाजा बजावत है जी, झेंडा झेड़ी मन मगन नाचत हवे जी...छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी छत्तीसगढ़ी भाषा में एक कविता सुना रहे है:
बजगरी मन मगन बाजा बजावत है जी, झेंडा झेड़ी मन मगन नाचत हवे जी-
जे दिन साथिन मन तेल हल्दी चड़ावत हवे जी, दूल्हा दुल्हिन के मन ह देख नाचत हवे-
वैद मन्त्र बामण सुनाथ हवे जी, आगी के आघु मा भवर इज़ारत हवे जी-
सात भवर हल्दी के सात गाठ, गठीयावत हवे जी-
सात जनम खातिर नाता ला, जोड़त हवे जी-
बियाह के बंधना हवे छन्दना, ज़िदगी भर खातिर हवे सुघर गेहना...

