सूरज सा चमकू मै,चंदा सा चमकू मै...बाल कविता
ग्राम-मोहली, पोस्ट-मोहली, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से नीलेंदर कुमार के साथ रोशनी एक कविता सुना रही है:
सूरज सा चमकू मै चंदा सा चमकू मै-
जगमग-जगमग हो उज्वल तारो सा दमकू मै-
मेरी अभीलाषा है,फूलो सा महकू मै-
विभो सा चह्कू गुन्जू सावनो पर कोयल सा कुह्कू मै-
मेरी अभिलाषा है नभ से निर्मल पानी-
सूरज सा चमकू मै चंदा सा चमकू मै...
Posted on: Aug 07, 2018. Tags: BALRAMPUR CG HINDI POEM NILENDARA KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
जगा रे आदिवासी भाई बहिन भाई सगा-सगा...जागरूकता गीत
ग्राम-बरटोली, पंचायत+प्रखंड-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखंड) से संध्या कुजूर और एलसी खुशबू कुजूर एक जागरूकता गीत सुना रहे है:
जगा रे आदिवासी भाई बहिन भाई सगा-सगा-
गांव जगा टोला जगा जगा-जगा-
जगा रे आदिवासी भाई बहिन भाई सगा-सगा-
जंगल के बचायक लागिन जगा-जगा-
जमीन के बचायक लागिन जगा-जगा-
जगा रे आदिवासी भाई बहिन भाई सगा-सगा...
Posted on: Aug 07, 2018. Tags: GUMLA HINDI SONG LE KHUSHBU KUJUR SANDHYA KUJUR SONG VICTIMS REGISTER
रोवत रहे दुवे हो नयना ढारे, रामगढे राम चन्दर सीता माई ला हरे...गीत-
ग्राम-कोटया, विकासखण्ड-प्रतापपुर, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक गीत सुना रहे हैं :
रोवत रहे दुवे हो नयना ढारे-
रामगढे राम चन्दर सीता माई ला हरे-
रोवत रहे दुवे हो नयना ढारे-
अंगना बहारे बढ़नी टूटी जाये-
ससुराली जाये नईहर छूटी जाये-
जय रघुनंदन पवन पिरीते, तुम्हार हमर जिन्दगी बहुत दिन बीते...
Posted on: Aug 06, 2018. Tags: HINDI MEWALAL DEWANGAN SONG VICTIMS REGISTER
परम पिता से प्यार नही रहे तो फिर व्यवहार नही...गीत-
ग्राम-रिमारी, जिला-सीधी (मध्यप्रदेश) से लालजी वैश्य एक संजीवनी गीत सुना रहे है :
परम पिता से प्यार नही रहे तो फिर व्यवहार नही-
इसीलिए तो आज देख लो कोई सुखी परिवार नही-
आम फूल-फल मेवा हमको समय-समय पर देता है-
लेकिन है इतना उधार बदले में कुछ नही लेता है-
देने में इंकार नही देत भाव तकरार नही-
ऐसे दानी का तू बंदे माने क्यों उपकार नही-
मानव के चोले में जाने कितने अंत लगाए हैं...
Posted on: Aug 05, 2018. Tags: HINDI SONG LALJI WAISHY SONG VICTIMS REGISTER
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले...भजन गीत
ग्राम-छुल्कारी, पोस्ट-पसला, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से मंदाकनी मिश्रा एक भजन गीत सुना रही है:
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले – गोविन्द नाम ले कर मेरे प्राण तन से निकली-
श्री गंगा जी का तट हो यमुना का बंशी बट हो-
निरा साव लानी कट हो जब प्राण तन से निकली-
श्री बन्दा बन का थल हो मेरे मुख के तुलसी दल हो-
दिस नौ चरण का जल हो जब प्राण तन से निकली....
