रे सुगना अब मत बाग अगोर रे सुगना, सूरज उगी न रतिया जागी न उतरी अब भोर...निर्गुण गीत -

सुनील कुमार मालीघाट, मुजफ्फरपुर (बिहार) से डॉ कुमार विरल की एक रचना सुना रहे हैं :
रे सुगना अब मत बाग अगोर रे सुगना – सूरज उगी न रतिया जागी न उतरी अब भोर –
खटते खटते खून जरईले जीते जी मर गईले – खटते खटते खून जरईले हासिल न भईले तोर – छूटल माटी गांव भूलाईल शहर नगर छिछिआईल – अजगर मुँह फईलवले बाटे सपना हो गईले थोड़ – रे सुगना अब मत बाग अगोर...

Posted on: Jan 01, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए...कविता एवं गीत -

दुष्यंत कुमार और भोजपुरी के राष्ट्रीय गीत के रचयिता बाबु रघुवीर नारायण जी की पुण्य तिथि के अवसर में एक कविता एवं गीत:
हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए-
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए-
आज यह दीवार परदों की तरह हिलने लगी-
शर्ते लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए-
हर सडक पर हर गली में हर नगर हर गाँव में-
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए-
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं-
मेरी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिए...
बाबु नारायण जी का गीत-
सुंदर सुभूमि भैया भारत के देशवा से-
मोरा प्राण बसे ही म कहे रे बटोहीया-
एक द्वार घेरे रामा हिमा कोतो वलवा से-
तीन द्वार सिन्धु गह रवे रे बटोहीया...

Posted on: Dec 31, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

जीवन को सीमित मत रखना, खाने और पाखाने तक...कविता -

मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार महेश ठाकुर चकोर की एक रचना सुना रहे हैं:
जीवन को सीमित मत रखना-
खाने और पाखाने तक-
जात-धर्म के दुश्चिंतन तक-
छल प्रपंच बहाने तक-
सड़ी-गली जो परम्पराएं-
चल उनको दफनाएं हम-
विषमता पाखण्ड अभाव-
को चल दूर भगाएं हम-
करते हम संघर्ष रहेंगे-
हर लब के मुस्काने तक-
जीवन को सीमित मत रखना-
खाने और पाखाने तक-
आज धर्म के नाम अमानुष-
ने कोहराम मचाया है-
सारे इंसां हैं दहशत में-
ऐसा रूप बनाया है-
दम ना लेंगे खाओ क़समें-
नामो-निशां मिटाने तक-
जीवन को सीमित मत रखना-
खाने और पाखाने तक-
दहशतगर्दों के आगे हम-
अपना शीश झुकाते हैं-
उन्हें नष्ट करने की सोचो-
तलवे हम सहलाते हैं-
चलो लड़ाई लड़ें मिलकर-
भय जग से भग जाने तक-
जीवन को सीमित मत रखना-
खाने और पाखाने तक-
जात-पात में बंटकर हम ने-
मानवता का नाश किया-
हैवानियत मिटे ऐसा-
कभी नहीं प्रयास किया-
क़फ़न बांधकर सर में निकलो-
आदमियत के आने तक-
जीवन को सीमित मत रखना-
खाने और पाखाने तक...

Posted on: Dec 30, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

हमसे पूछेला चूड़ी कंगनवा, कबले अईहे सजनवा की मनवा लागत नईखे...भोजपुरी गीत -

मालीघाट, मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक भोजपुरी गीत सुना रहे हैं :
हमसे पूछेला चूड़ी कंगनवा, कबले अईहे सजनवा की मनवा लागत नईखे – दम तोड़ेला दिल के सपनवा झर -झर बहे नयनवां की मनवा लागत नईखे – चिट्ठी न पाती भेजला जब से गईल परदेश हो – कवना करनवां से सजना तू हु भूलवल अपना देश हो – कजरा सूखल गजरा टूटल काँट भईल सूखी तनवा – बड़ा निरमोही बाड़े आवेले न रात के सपनवां – अखियाँ से बहतारे लोड़बा रे बन के अरमनवा – परदेश राजा अभियो से आजा साल भर भईले गवनवा...

Posted on: Dec 30, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

पंछी जपईया हरिनाम बिरिछ पर...बज्जिका भाषा में पराती गीत-

मालीघाट मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार सुबह के समय बुजुर्गों के द्वारा गाया जाने वाला बज्जिका भाषा में पराती गीत सुना रहे हैं जो अब विलुप्त होने के कगार पर है :
पंछी जपईया हरिनाम बिरिछ पर – पंछी जपईय हरिनाम – नीचे से ब्याधा सर-नर ताने, ऊपर उडईय बाझ बिरिछ पर – ब्याधा के डसलक काली नगिनिया, बझबा के लागल गले फांस
पंछी जपईया हरिनाम बिरिछ पर...

Posted on: Dec 29, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

« View Newer Reports

View Older Reports »