बोलकार बना हो, अप्पन गांव के बात दूर फैलाव हो...सीजीनेट गीत -
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार सीजीनेट के सम्बन्ध में एक गीत सुना रहे है:
बोलकार बना हो-
अप्पन गांव के बात दूर फैलाव हो-
गीत संगीत रीति रिवाज-
परंपरा के बताव हो-
अप्पन गांव के बात दूर फैलाव हो-
सीज नेट जन पत्रकारिता-
सूचना क्रांति के जान हो-
आपन दुख सुख के सबके बताव हो-
Posted on: Jan 21, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
पापा मुझको वीर भगत या खुदीराम बना दो ना...रचना -
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार राजेश चौधरी की रचना सुना रहे है:
पापा मुझको वीर भगत या खुदीराम बना दो ना-
आजादी के लिए मरुंगा मैं-
मुझे शहीद बनादो ना-
कास मुझे भी फाँसी मिलतीं-
कालापानी मुझको मिलता-
कहलाता मैं वीर सेनानी-
यह हक मुझे दिलादो ना-
आंग्रेज़ो को मार भगाता-
गोरों पर आतंक मचाता-
सीना में बारूद छूपाये-
दुश्मनों का महल उड़ाता-
ऐसा सबक सिखादो ना-
धरती माँ के काम मैं आउ-
दुश्मन को मैं मार गिराऊं-
वह ब्रामस्त्र दिलादो ना – देश के खातिर मेरे सर को-
सीमा पर चढ़ा दो ना-
चंद्रशेखर आजाद हमारे-
पुण्यभूमि को प्राप्त हुये-
राजगुरू और बिश्मिलाखां-
हँसते हँसते प्राण दिए-
मैं भी चाहू उनसा बनना-
पापा मुझे बना दो ना...
Posted on: Jan 18, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
बेहतरी की उम्मीद का पर्व, मकर संक्रांति...
निराशा में तिल–तिल आशा भरने के उल्लास का पर्व है मकर संक्रांति। हमारे वैदिक मान्यताओं में इसी दिन से सूर्य उत्तरायण में जाता है। हमारा पूरा जीवन बस इसी उम्मीद पर टिका होता है कि हमारा आने वाला कल आज से बेहतर होगा। यह बेहतरी की उम्मीद का पर्व है। इसीलिए यह महापर्व है। तिल प्रतीक है ‘सूक्ष्मता के बावजूद बेहद असरकारी होने का’। इसीलिए मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ के दान का चलन है। इसके सेवन से हर प्रकार की बीमारी दूर होती है। आईए हम सब मिलकर तिल -तिल आशा का उल्लास जगाएं,ताकि वहां से एक नया सवेरा हो. सुनील कुमार@9308571702
Posted on: Jan 16, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
क्यों इतना लाचार आदमी...कविता -
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार मुन्ना गुरु की रचना सुना रहे है:
क्यों इतना लाचार आदमी-
आज हुआ बेजार आदमी-
कितना नीचे और गिरेगा-
बिकने को तैयार आदमी-
पैरों तले जमीन नहीं है-
उड़ता पंख पसार आदमी-
मौत धड़ल्ले बाँट रहा है-
जीवन का हकदार आदमी-
काट रहा है अपनी ही जड़-
खुद लेकर तलवार आदमी...
Posted on: Jan 15, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
कभी तो इंडिया को भूलकर भारत की तस्वीर को देखो...कविता -
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार सुनील तेलामरी की रचना सुना रहे है:
कभी तो इंडिया को भूलकर भारत की तस्वीर को देखो-
कभी लाचार और बेबस के दिल में रोज उठती पीर को देखो-
यहां दो वक्त की रोटी की चिंता में गुजरते दिन-
गरीबी, भूख,महंगाई से जकड़ी जुल्म की जंजीर को देखो-
चलो ये माना हमने साइबर युग आ गया है-
मगर कोई बदल पाया नही, इंसान की तक़दीर को देखो-
तेरे ऊँचे महल ये शानो-शौकत इनके दम से है-
फनाह हो जाएगी ये सल्तनत है, आ में तासीर को देखो-
कभी तो इंडिया को भूलकर भारत की तस्वीर को देखो...





