चल तो गुहिया रे आमा बगीचा...गीत
ग्राम-गुडेफल, पंचायत-दमकासा, ब्लाक-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से सुनील कुमार और शिवराज एक गीत सुना रहे है:
चल तो गुहिया रे आमा बगीचा-
जुलू हम जुलुम रे पका को खिलाबो-
कच्चा को फेकाबो चल संगिया चल रे-
चल तो गुहिया रे आमा बगीचा...
Posted on: Jan 24, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR SHIVRAJ VICTIMS REGISTER
जयति जय जय माँ सरस्वती जयति वीणा धारणी...भजन गीत -
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के उपलक्ष्य में एक भजन गीत सुना रहे है:
जयति जय जय माँ सरस्वती जयति वीणा धारणी-
जयति पदमासन हे माता-
जयति शुभवरदायणि-
जगत का कल्याण कर माँ-
तु ही जग की जननी-
जयति जय जय माँ सरस्वति जयति वीणा धारणी...
आ आ आ आ आ आ
Posted on: Jan 23, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
बोलकार बना हो, अप्पन गांव के बात दूर फैलाव हो...सीजीनेट गीत -
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार सीजीनेट के सम्बन्ध में एक गीत सुना रहे है:
बोलकार बना हो-
अप्पन गांव के बात दूर फैलाव हो-
गीत संगीत रीति रिवाज-
परंपरा के बताव हो-
अप्पन गांव के बात दूर फैलाव हो-
सीज नेट जन पत्रकारिता-
सूचना क्रांति के जान हो-
आपन दुख सुख के सबके बताव हो-
Posted on: Jan 21, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
पापा मुझको वीर भगत या खुदीराम बना दो ना...रचना -
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार राजेश चौधरी की रचना सुना रहे है:
पापा मुझको वीर भगत या खुदीराम बना दो ना-
आजादी के लिए मरुंगा मैं-
मुझे शहीद बनादो ना-
कास मुझे भी फाँसी मिलतीं-
कालापानी मुझको मिलता-
कहलाता मैं वीर सेनानी-
यह हक मुझे दिलादो ना-
आंग्रेज़ो को मार भगाता-
गोरों पर आतंक मचाता-
सीना में बारूद छूपाये-
दुश्मनों का महल उड़ाता-
ऐसा सबक सिखादो ना-
धरती माँ के काम मैं आउ-
दुश्मन को मैं मार गिराऊं-
वह ब्रामस्त्र दिलादो ना – देश के खातिर मेरे सर को-
सीमा पर चढ़ा दो ना-
चंद्रशेखर आजाद हमारे-
पुण्यभूमि को प्राप्त हुये-
राजगुरू और बिश्मिलाखां-
हँसते हँसते प्राण दिए-
मैं भी चाहू उनसा बनना-
पापा मुझे बना दो ना...
Posted on: Jan 18, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
बेहतरी की उम्मीद का पर्व, मकर संक्रांति...
निराशा में तिल–तिल आशा भरने के उल्लास का पर्व है मकर संक्रांति। हमारे वैदिक मान्यताओं में इसी दिन से सूर्य उत्तरायण में जाता है। हमारा पूरा जीवन बस इसी उम्मीद पर टिका होता है कि हमारा आने वाला कल आज से बेहतर होगा। यह बेहतरी की उम्मीद का पर्व है। इसीलिए यह महापर्व है। तिल प्रतीक है ‘सूक्ष्मता के बावजूद बेहद असरकारी होने का’। इसीलिए मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ के दान का चलन है। इसके सेवन से हर प्रकार की बीमारी दूर होती है। आईए हम सब मिलकर तिल -तिल आशा का उल्लास जगाएं,ताकि वहां से एक नया सवेरा हो. सुनील कुमार@9308571702





