बेटी हूँ मैं, बेटी मैं तारा बनूँगी...गीत
जीवन संगम बोधगया (बिहार) से सुनील कुमार जन आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वय के कार्यक्रम में गाए जा रहे गीत को सुना रहे हैं :
बेटी हूँ मैं बेटी मैं तारा बनूँगी-
लिखुंगी पढूंगी मैं मेहनत भी करूंगी-
अपने पांवो से चलकर दुनिया को देखूंगी-
दुनिया को देखूंगी मै दुनिया को समझूंगी-
फूल जैसी सुंदर बागों में खेलूंगी-
तितली बनूंगी मैं हवा को चूमुंगी...
Posted on: Feb 26, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
हो-हो हाय संस्कृति को हम बचाएं...आंदोलन गीत
सुनील कुमार, मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से एक आंदोलन गीत सुना रहे हैं: -
हो-हो हाय संस्कृति को हम बचाएं-
मिलजुल हम सब करे जतन सोचे कोई उपाए-
गोंवरो शाली बिरसत जानें समझें भाए-
गांव-गांव मैं काला भवन हो गाय बजाएं भाए-
लोक कला को समझें हम इसकों खूब बढ़ाये-
भाई बहन सब मिलजुल नाचे झूमें नाचे गाये – हो-हो हाय संस्कृति को हम बचाएं...
Posted on: Feb 24, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
हमसे पुछेला चूड़ी कंगनवा, कब ले सजनवा की...भोजपुरी गीत
सुनील कुमार मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से एक भोजपुरी गीत सुना रहे है:
हमसे पुछेला चूड़ी कंगनवा कब ले सजनवा की-
मनवा लागत नहीं के मनवा लागत नहीं के-
दम तोडेला दिल के सपनवा-
झर-झर बहे नयनवा की-
चिट्टी न पाठी भेजेला-
जब से गईला परदेश वो-
कौन कारणवा सजना-
तू बुललवा अपना देश वो-
गजरा सुखल गजरा टूटल-
कट बहिल सुखी तनवा-
की मनवा लागत नहीं के...
Posted on: Feb 19, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
दर्द आखिर तक छिपाया तुम करो, हौसले भी आजमाया तुम करो...गजल गीत
जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) मालीघाट से सुनील कुमार एक गजल सुना रहे हैं:
दर्द आखिर तक छिपाया तुम करो, हौसले भी आजमाया तुम करो-
जिन्दगी की रौनक बदल जाएगी यु कभी खुद को हंसाया तुम करो-
गम जदा को यू लुभाना पलक में मुस्कान दिल का खुदाया तुम करो-
चाँद जैसे यू डुबो दे इश्क में दिलों को सजाया तुम करो-
राहें गुजर जाएगी बगल से राज नीशा यू डिहाया तुम करो...
Posted on: Feb 17, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
दोस्त अब थकने लगे हैं, किसी का पेट निकल आया है, किसी के बाल पकने लगे हैं...कविता
मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक कविता सुना रहे हैं:
दोस्त अब थकने लगे हैं किसी का पेट निकल आया है किसी के बाल पकने लगे हैं-
सब पर भारी जिम्मेदारी है सबको छोटी-मोटी कोई बीमारी है-
दिन भर जो भागते दौड़ते थे वो अब चलते-चलते रुकने लगे हैं-
पर ये हकीकत है सब दोस्त थकने लगे हैं-
किसी को लोन की फ़िक्र है किसी को हेल्थ टेस्ट का जिक्र है-
फुर्सत की सबको कमी है आँखों में अजीब सी नमी है-
कल प्यार के ख़त लिखते थे आज बीमें के फार्म भरने लगे है...





