सुनो सुनो भगत सिंह मर चुका है...एक कविता

सुनो सुनो भगत सिंह मर चुका है
देश के ए नवजवानों सुनो भगत सिंह मर चुका है
सुनो ए आसमा सुनो ए जमीन
ए हवा तुमभी सुनो भगत सिंह मर चुका है
इतिहास को भी सुनाओ और संस्कृति को भी बताओ
भगत सिंह मर चुका है भगत सिंह मर चुका है
आज हर किसी के दिलो से भगत सिंह मर चुका है
जोश भी मर चुका है वो विचार भी मर चुका है
देश का संविधान मर चुका है लोगो का विश्वास भी मर चुका है
नेताओ का चरित्र मर चुका है देश का लोकतंत्र मर चुका है
सुनो मुल्क के ए नवजवानों भगत सिंह मर चुका है

संवेदनाये मर चुकी है, मर चुका है न्याय
बुझ गयी है दिलो की आग, इंक़लाब मर चुका है
सुनो ए नवजवानों भगत सिंह मर चुका है
भगत सिंह मर चुका है भगत सिंह मर चुका है
शहीद भगत सिंह शहीद सुखदेव शहीद राजगुरु की शहादत को शत शत सलाम
के एम् भाई

Posted on: Mar 23, 2013. Tags: KM Yadav

दिन में आलू बेचना तो रात रात भर जागकर RTI आवेदन लिखना ...एक कविता

एक था RTO का दलाल
शराबी भी था और शौकीन भी
दलाली कर पैसा कमाना जिसका था शगल
जिसे न परिवार की चिंता थी न समाज की
बस रहता था नशे में मस्त
पर एक दिन की घटना ने जिसकी बदल दी अक्ल
और फिर RTO की दलाली से निकला एक RTI कार्यकर्ता
नशे की लत छूटी और शौक ने समाज सेवा का रूप ले लिया
जुनून ऐसा कि जिसके हाथ RTI आवेदन लिखते लिखते थकते नहीं
और मुँह से RTI के लिए आवाज बंद होती नहीं
स्वास्थ विभाग हो या फिर राशन विभाग
शंकर सिंह का RTI आवेदन आपको जरूर मिलेगा
डीएम हाउस से लेकर पीएम् हाउस तक शंकर सिंह के नाम की चर्चा है
कहते है किसी भी विभाग से सूचना दिलाने की ताकत रखता है ये बन्दा
पर जिंदगी का भी खेल देखिये साथियों
समाज के लिए लड़ने वाले के घर में
रोटी-दाने का इंतजाम करने वाला कोई नहीं
बीमार बच्चे के इलाज की भी कोई व्यवस्था नहीं
एक समय ऐसा भी आर्थिक कंगाली से जूझ रहे
परिवार के भरण पोषण का भी कोई इंतजाम नहीं
ऐसे में जिंदगी ने दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया जहाँ,
एक तरफ फिर से वही RTO की काली कमाई और दलाली का स्वर्ग था
तो दूसरी तरफ मेहनत और ईमानदारी की आलू की ठेलिया का गर्व था
साथियों एक आम आदमी की नैतिकता और इंसानियत की अनूठी मिसाल देखिये,
घोर विपत्ती के समय में भी इस आठवी पास व्यक्ति ने
ईमानदारी का दामन नहीं छोड़ा
और RTO की दलाली का रास्ता ठुकराकर, आलू की ठेलिया से नाता जोड़ा
जीवन के इस कठिन मोड़ पर भी शंकर सिंह ने RTI से मुंह न मोड़ा
और अपनी आलू की ठेलिया से ही RTI की मुहीम को फिर छेड़ा
दिन में आलू बेचना तो रात रात भर जागकर RTI आवेदन लिखना
यहाँ तक कि हर आलू खरीदने वाले को RTI का इस्तेमाल करना भी सिखाना
इसे शंकर सिंह का जूनून ही कहेंगे जिसने
उन्हें आलू की ठेलिया से ‘जनता सूचना केंद्र” तक पहुँचाया
आज वे एक बार फिर से अपने इस जनता सुचना केंद्र के माध्यम से कमजोर और असाहय लोगो के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे है

शंकर सिंह के इस जज्बे और जूनून को कोटि कोटि सलाम

यह कविता प्रसिद्ध RTI कार्यकर्ता शंकर सिंह के जीवन से प्रेरित है।

Posted on: Feb 17, 2013. Tags: KM Yadav

No Govt scheme in this village, Children learn nothing in schools, they allege...

KM bhai today is visiting a village called Jogindera near Kanpur in Uttar Prradesh. A scheduled Tribe of snake charmers live in this village from more than 150 years. They do not have any land and they say no goverhment scheme runs in their village. They send their children to school but they do not learn to even write their names after going to school for 5 years. Their women work in other people’s farms as laborers. When will any govt scheme look at these people he asks. For more KM bhai can be reached at 08756011826

Posted on: Dec 17, 2012. Tags: KM Yadav

हमरे गाँव में बिजली न आई...एक कविता

कैसा विकास और कैसी आज़ादी
आज़ादी के 65 वर्षो के बाद भी
हमरे गाँव में बिजली न आई
दिवाली की जगमग है चारो ओर
पर हमरे गाँव में अँधियारा है चहुँ ओर
भाजपा गयी कांग्रेश आई बसपा गयी सपा आई
पर हमरे गाँव में बिजली न आई
केबिनेट बदला, मंत्री बदले, बदला पूरा मंत्रिमंडल
पर न बदला हमरे गाँव का मुखमंडल
नए शासनादेश आये, नयी नयी विकास योजनाये आई
पर हमरे गाँव में बिजली की कोई योजना न आई
सुना है उ प्र के कुछ जिलो में 24 घंटे बिजली आती है
पर हमरे गाँव में तो एक सेकेण्ड के लिए भी बिजली नहीं आती है
हमरे गाँव से 3 किमी की दूरी पर आई आई टी कानपूर है कहते है जहाँ कभी अन्धेरा नहीं होता
पर हमरे गाँव का अन्धेरा कभी समाप्त नहीं होता
ये कैसा न्याय और कैसी समानता है
जहाँ एक तरफ शहर रोशनी से नहाये हुए है
तो वही हमरा गाँव रोशनी की एक किरण के लिए तरस रहा है
शहरो की सडको गली मुहल्लों यहाँ तक मैदानों में बिजली बेकार हो रही है
पर हमरे गाँव की गलियां माँ बिजली का नमो निशान नहीं
1947 में देश को अंग्रेजो के चंगुल से आज़ादी मिली पूरा देश खुश हुआ
लड्डू बटे फुल्जरियाँ फूटी रंग गुलाला उड़ा
हम भी खुश और हमरा गाँव भी खुश
सत्ता बदली शासन बदला अपना देश अपना प्रधानमंत्री
नयी नयी योजनाये नयी नयी नीतिया
पर हमरे गाँव के लिए न कोई विकास नीति और न कोई योजना
सन 1971 में राजीव गाँधी ग्रामीण विधुतीकरण योजना ने खूब नाम कमाया
पर 30 वर्ष बाद भी हमरे गाँव का विधुतीकरण न हो पाया
फिर आई डा आंबेडकर ग्राम सम्पूर्ण विधुतीकरण योजनां की बारी
पर हमरे गाँव में बिजली फिर भी न आई
ग्लोबल इंडिया और इंडिया सयिनिंग ने पुरे देश को चमकाया
पर हमरे गाँव में बिजली का एक खम्बा भी न गड़ पाया
एक बार फिर से लोहिया ग्राम समग्र विकास योजना ने सपना दिखाया
पर हमरे गाँव का नंबर फिर भी न आया
2012 जाने वाला है पर पता नहीं हमरे गाँव का नंबर कब आने वाला है
कभी फुर्सत मिले तो एक बार हमरे गाँव का भी चक्कर लगाना
तो पता चलेगा दिए की रोशनी में कैसे सपने पलते है और दिए बुझने के साथ ही बुझ जाते है
किस तरह अँधेरे में जिन्दगिया पल रही है
किस तरह अँधेरा हमरे गाँव में अपना घर बनाकर बैठा है
न कोई रोशनी है न कोई उम्मीद और न ही कोई विकास
बस सिर्फ अँधेरा ही अँधेरा है ...
बस सिर्फ अँधेरा ही अँधेरा है ...

के एम् भाई

Posted on: Dec 10, 2012. Tags: KM Yadav

क्यों नहीं इसे मरा हुआ तन्त्र कहते हैं? एक कविता

जहाँ जनता रोती है और लोकतंत्र हँसता है
न्यायलय भी कैसा अँधा है जो सिर्फ दलीले सुन सकता है और तारीखे दे सकता है,
पर उससे न्याय की उम्मीद करना बईमानी है।
पुलिस प्रशासन से लाख मिन्नतें मांग लो पर उनका जमीर नहीं जागता,
मुर्दा भी पड़े-पड़े सड़ जाये वो हाथ भी नहीं लगायेंगे।
राजा (मुख्यमंत्री) के दरबार में आपको पोटली भर आश्वासन तो मिल जायेगा,
पर उस पर कार्यवाही धेला भर भी नहीं होगी।
महामहिम (राष्टपति) का दरबार सबके लिए नहीं खुलता बस चिठ्ठी भेजिए और अगली सदी आने का इंतज़ार करिए,
पता नहीं जब तक नम्बर आयेगा तब आदमी बचेगा या नहीं।
मंत्री – नेता, दलाली और कमीसन खोरी के बगैर अपनी दुम तक नहीं हिलाते,
फ़रियाद सुनना तो दूर की कोड़ी है।
क्यों इसे लोकतंत्र कहते है ?
क्यों नहीं इसे मरा हुआ तन्त्र कहते हैं?
मरा हुआ तंत्र...
मरा हुआ तंत्र ...
के एम् भाई
8756011826

Posted on: Nov 09, 2012. Tags: KM Yadav

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